देहरादून/भराड़ीसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी भराड़ीसैंण में 9 मार्च से प्रस्तावित पांचवीं विधानसभा का बजट सत्र शुरू होने से पहले ही सियासी माहौल गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सत्र की अवधि, कार्यवाही की रूपरेखा और मुख्यमंत्री के प्रश्नकाल को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना ली है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार लगातार विपक्ष के सवालों से बचने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि हर बार की तरह इस बार भी सोमवार को राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित किया गया है, जबकि राज्य की परंपरा के अनुसार सोमवार का दिन मुख्यमंत्री के प्रश्नकाल के लिए निर्धारित माना जाता रहा है। आर्य का आरोप है कि मुख्यमंत्री धामी ने अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में एक भी सोमवार को प्रश्नकाल का प्रत्यक्ष रूप से सामना नहीं किया है, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार के पूरे कार्यकाल में अब तक विधानसभा के केवल 32 कार्य दिवस हुए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार सदन को चलाने और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के प्रति गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि इस बार भी सरकार ने बजट सत्र को सीमित रखने की तैयारी की है ताकि विपक्ष के सवालों से बचा जा सके।
आर्य ने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री के पास 40 महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी है, तो उन विभागों से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष सवाल क्यों न पूछे। लेकिन सरकार इन सवालों से बचने के लिए खामोशी साधे हुए है। उन्होंने कहा कि 9 मार्च, सोमवार को गैरसैंण में राज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तावित है और मुख्यमंत्री स्वयं वित्त मंत्री भी हैं, इसलिए बजट पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
उन्होंने मांग की कि बजट सत्र कम से कम 21 दिन का आयोजित किया जाए और विभागवार चर्चा के लिए भी न्यूनतम चार दिन का समय निर्धारित किया जाए। आर्य के मुताबिक सीमित अवधि का सत्र लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है और इससे जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा संभव नहीं हो पाएगी।
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस बजट सत्र में कई अहम मुद्दों को उठाएगी। इनमें विद्यालय विहीन शिक्षकों की समस्या, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, आपदा प्रभावितों को राहत, राज्य में अवरुद्ध विकास कार्य, किसान आत्महत्या के मामले, किसानों को फसल का उचित मूल्य न मिलना, महिलाओं पर बढ़ते उत्पीड़न की घटनाएं, कमजोर वर्गों, अल्पसंख्यकों और दलितों पर अत्याचार तथा प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था जैसे विषय शामिल हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है क्योंकि उसके पास विपक्ष के सवालों का ठोस उत्तर नहीं है। बजट सत्र शुरू होने से पहले ही इस तरह के तीखे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से साफ है कि भराड़ीसैंण में होने वाला सत्र काफी हंगामेदार रहने की संभावना है।