रुद्रप्रयाग: पंच केदारों में तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली सोमवार को अपने शीतकालीन गद्दी स्थल मर्कटेश्वर तीर्थ मक्कूमठ से विधि-विधान के साथ कैलाश के लिए रवाना हो गई। पूरे क्षेत्र में इस दौरान भक्ति, आस्था और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला।
ब्रह्म बेला में विद्वान आचार्यों ने पंचांग पूजन और विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भगवान तुंगनाथ सहित तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का आह्वान किया। इसके बाद भव्य श्रृंगार और आरती के उपरांत डोली ने मक्कूमठ की तीन परिक्रमा कर अपनी पावन यात्रा प्रारंभ की।
तुंगनाथ मंदिर, जो चन्द्रशिला शिखर की तलहटी में स्थित है, उसके कपाट 22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में वेद मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
डोली प्रस्थान के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक मांगल गीत गाए, वहीं श्रद्धालुओं ने “हर-हर महादेव” के जयघोष के साथ वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भक्तों ने पुष्प, अक्षत और रंग-बिरंगे वस्त्र अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं।
यात्रा के दौरान डोली खेत-खलिहानों से गुजरते हुए पुढखी पहुंची, जहां ग्रामीणों ने नए अन्न का भोग अर्पित कर क्षेत्र की समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। इसके पश्चात डोली रात्रि विश्राम के लिए भूतनाथ मंदिर पहुंची।
डोली प्रभारी प्रकाश पुरोहित के अनुसार, 21 अप्रैल को डोली भूतनाथ मंदिर से प्रस्थान कर पाव, चिलियाखोड़, पंगेर और बनियाकुंड होते हुए चोपता पहुंचेगी, जहां अंतिम रात्रि विश्राम होगा। इसके बाद 22 अप्रैल को धाम पहुंचते ही भगवान तुंगनाथ के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए जाएंगे।
इस अवसर पर केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल समेत कई जनप्रतिनिधि, मंदिर समिति के पदाधिकारी, हक-हकूकधारी और सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। तुंगनाथ डोली यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखती है।