उत्तराखंड में भर्ती कैलेंडर पर सवाल: 22 में से 16 परीक्षाएं सिर्फ प्रवक्ता पदों की, बाकी भर्तियों पर सन्नाटा

उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं को इस बार गहरा झटका लगा है। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जारी नए भर्ती कैलेंडर ने उम्मीदों के बजाय निराशा बढ़ा दी है। कैलेंडर में कुल 22 भर्तियों का जिक्र जरूर है, लेकिन इनमें से 16 परीक्षाएं केवल प्रवक्ता (Lecturer) पदों के लिए निर्धारित की गई हैं।

युवाओं का कहना है कि जिन बड़ी भर्तियों का वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे—जैसे पीसीएस, लोअर पीसीएस, समीक्षा अधिकारी (RO), सहायक समीक्षा अधिकारी (ARO), सहायक अभियंता (AE) और जूनियर इंजीनियर (JE)—उनका इस कैलेंडर में कहीं भी स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इससे अभ्यर्थियों में असमंजस और चिंता का माहौल बन गया है।

प्रवक्ता भर्तियों पर आयोग का पूरा फोकस

आयोग के कैलेंडर के अनुसार, 21 अप्रैल से लेकर 6 दिसंबर तक विभिन्न परीक्षाओं का आयोजन प्रस्तावित है। इस अवधि में राजकीय इंटर कॉलेजों के लिए प्रवक्ता भर्ती को प्राथमिकता दी गई है।

प्रवक्ता पदों के लिए विषयवार मुख्य परीक्षाओं की लंबी श्रृंखला तय की गई है, जिसमें भौतिक विज्ञान, नागरिक शास्त्र, हिंदी, इतिहास, कृषि, गणित, जीव विज्ञान, अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, वाणिज्य, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, संस्कृत, गृह विज्ञान और कला जैसे विषय शामिल हैं।

लगातार इतने बड़े पैमाने पर प्रवक्ता परीक्षाओं का आयोजन यह संकेत देता है कि आयोग इस वर्ष शिक्षा विभाग की भर्तियों को प्राथमिकता दे रहा है।

बड़ी भर्तियों पर अनिश्चितता

हालांकि, युवाओं की असली चिंता उन भर्तियों को लेकर है जिन पर उनका भविष्य निर्भर है।

  • नई पीसीएस भर्ती का कोई जिक्र नहीं

  • लोअर पीसीएस परीक्षा का भी अभाव

  • समीक्षा अधिकारी और सहायक समीक्षा अधिकारी भर्तियां स्पष्ट नहीं

  • AE और JE जैसी तकनीकी भर्तियां भी गायब

यह स्थिति उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए निराशाजनक है, जो पिछले कई वर्षों से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

सीमित अन्य परीक्षाएं, कुछ तारीखें रिजर्व

कैलेंडर में प्रवक्ता परीक्षाओं के अलावा केवल कुछ ही अन्य परीक्षाओं का जिक्र है।

  • 19 मई: समीक्षा अधिकारी लेखा परीक्षा-2024

  • 19 जुलाई: हाईकोर्ट समीक्षा अधिकारी टाइपिस्ट और लाइब्रेरियन स्क्रीनिंग टेस्ट

इसके अलावा आयोग ने 6 सितंबर और 4 अक्टूबर की तारीखें रिजर्व रखी हैं, जिन पर भविष्य में परीक्षाएं तय की जा सकती हैं।

युवाओं में बढ़ती चिंता

भर्ती कैलेंडर सामने आने के बाद युवाओं में असंतोष बढ़ गया है। उनका कहना है कि आयोग को पारदर्शिता के साथ सभी प्रमुख भर्तियों की स्पष्ट योजना पेश करनी चाहिए।

कई अभ्यर्थियों का मानना है कि बार-बार देरी और अनिश्चितता के कारण उनकी तैयारी, समय और करियर पर असर पड़ रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आयोग आगे इन महत्वपूर्ण भर्तियों को लेकर क्या कदम उठाता है।

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