नैनीताल: उत्तराखंड के नैनीताल स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय ने धर्म और पहचान छुपाकर शादी करने तथा पत्नी की हत्या के सनसनीखेज मामले में आरोपी ऋषभ तिवारी उर्फ ‘इमरान’ को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल को मृतका की माता को आर्थिक सहायता देने के निर्देश भी दिए हैं।
होटल के कमरे में मिली थी दीक्षा की लाश
मामले के अनुसार, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर निवासी श्वेता शर्मा ने मल्लीताल कोतवाली में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया था कि 14 अगस्त 2021 को अभियुक्त ऋषभ तिवारी उर्फ इमरान अपनी पत्नी दीक्षा, शिकायतकर्ता और अपने मित्र अलमास के साथ नैनीताल घूमने आया था। शाम को मल्लीताल के एक होटल में दो कमरे लिए गए। 16 अगस्त को जब दीक्षा और अलमास से संपर्क नहीं हो पाया और ऋषभ का फोन स्विच ऑफ मिला, तो कमरे में जाकर देखा गया। वहां दीक्षा नग्न अवस्था में मृत पाई गई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
लंबी सुनवाई के बाद दोष सिद्ध
मामले की विवेचना और न्यायालय में लंबी बहस के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने गाजियाबाद निवासी ऋषभ उर्फ इमरान को दोषी करार दिया। बचाव पक्ष की ओर से दो गवाह पेश किए गए, जिनमें एक काजी भी शामिल था जिसने निकाहनामा साबित करने की कोशिश की, लेकिन अभियोजन पक्ष ने उसे फर्जी साबित कर दिया।
17 गवाहों के बयान और वैज्ञानिक साक्ष्य
सरकारी अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा की ओर से 17 गवाहों के बयान न्यायालय में दर्ज कराए गए। अभियोजन ने केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला चंडीगढ़ के विशेषज्ञों को भी न्यायालय में पेश किया, जिन्होंने घटनास्थल से बरामद डीवीआर सहित अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की पुष्टि की।
धर्म और असली पहचान छुपाने का आरोप सिद्ध
अभियोजन के अनुसार आरोपी ने दीक्षा से अपना असली नाम और धर्म छुपाया था। हत्या करने के बाद वह मृतका के जेवरात और महत्वपूर्ण कागजात भी अपने साथ ले गया था।
अदालत का फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।