मसूरी में रेलवे भूमि पर बड़ा एक्शन, होटल समेत कई भवनों को बेदखली नोटिस

नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद उत्तर रेलवे की कार्रवाई तेज, 7 दिन में जवाब नहीं देने पर हो सकती है बेदखली

मसूरी। मसूरी के झड़ीपानी क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर कथित अतिक्रमण के खिलाफ उत्तर रेलवे ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुरादाबाद मंडल के संपदा अधिकारी ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत होटलों और अन्य भवनों के मालिकों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर बेदखली की कार्रवाई की जा सकती है।

रेलवे की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि संबंधित भवन और होटल वर्ष 2011 से रेलवे की भूमि पर कथित रूप से अनधिकृत कब्जे में हैं। अधिनियम की धारा-4 के तहत संबंधित पक्षों से पूछा गया है कि उनके खिलाफ बेदखली का आदेश क्यों न पारित किया जाए। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में आवश्यक दस्तावेज और जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर संपदा अधिकारी एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए बेदखली का आदेश जारी कर सकते हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई

रेलवे की यह कार्रवाई नैनीताल हाईकोर्ट में लंबित वाद संख्या 2992/2023 में 16 जून 2026 को दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद रेलवे प्रशासन ने अपनी भूमि का रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया है और जहां भी कथित अतिक्रमण पाए जा रहे हैं, वहां कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

झड़ीपानी क्षेत्र में नोटिस चस्पा होने के बाद होटल संचालकों और स्थानीय भवन स्वामियों में चिंता का माहौल है। कई लोगों का कहना है कि वे दशकों से यहां रह रहे हैं और भूमि के स्वामित्व को लेकर उनके पास अलग दावा है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

झड़ीपानी निवासी मुकुंद सेमवाल ने रेलवे की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह पिछले 50 से 60 वर्षों से वहां रह रहे हैं। उनके अनुसार संबंधित भूमि पहले उत्तर प्रदेश सरकार और बाद में उत्तराखंड सरकार के अधीन रही तथा वर्तमान में नगर पालिका मसूरी के अधिकार क्षेत्र में है। उनका कहना है कि यदि भूमि को लेकर कोई विवाद है तो पहले नगर पालिका से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

वहीं स्थानीय निवासी भावना गोस्वामी ने आरोप लगाया कि रेलवे के कर्मचारी पहले रात में भी मौके पर आकर तस्वीरें ले गए थे और अब नाम पूछकर नोटिस चस्पा कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मामला न्यायालय के आदेश पर आधारित है तो संबंधित व्यक्तियों के नाम पहले से स्पष्ट होने चाहिए और भूमि का विधिवत सीमांकन भी किया जाना चाहिए।

रेलवे ने कहा- कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रही कार्रवाई

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा उनकी कानूनी जिम्मेदारी है। यदि कोई व्यक्ति या संस्था बिना वैध अनुमति रेलवे की भूमि का उपयोग कर रही है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी कब्जाधारी को पहले अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाता है और उसके बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।

कानूनी विशेषज्ञों की राय

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत जारी कारण बताओ नोटिस अंतिम आदेश नहीं होता, बल्कि संबंधित पक्ष को अपना पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाता है। यदि वैध स्वामित्व या कब्जे के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते, तो संपदा अधिकारी बेदखली का आदेश पारित कर सकते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले भी मसूरी और देहरादून क्षेत्र में रेलवे भूमि पर बने कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और भवनों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, नैनीताल हाईकोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद रेलवे की कार्रवाई में तेजी आई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में रेलवे की भूमि पर बने अन्य कथित अतिक्रमण भी जांच और कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

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