उत्तरकाशी: उत्तराखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पर्वतीय क्षेत्रों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। भूस्खलन, भू-धंसाव और सड़कें बंद होने से दूरस्थ गांवों में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड में सड़क बंद होने के कारण ग्रामीणों ने एक बीमार महिला को डंडी-कंडी के सहारे करीब पांच किलोमीटर पैदल ले जाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां से एंबुलेंस के जरिए उसे अस्पताल भेजा गया।
दूसरी ओर कलाप, ओसला और आसपास के गांवों में भी बारिश ने हालात गंभीर बना दिए हैं। कई गांवों का सड़क संपर्क टूट गया है, बिजली और पेयजल आपूर्ति ठप है, जबकि लोग जान जोखिम में डालकर उफनाते नालों और क्षतिग्रस्त रास्तों से आवाजाही करने को मजबूर हैं।
बेहोश हुई महिला, ग्रामीणों ने डंडी-कंडी पर पहुंचाया सड़क तक
मोरी विकासखंड के रेक्चा गांव निवासी सपना, पत्नी आनंद सिंह, की अचानक तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। परिजनों ने वाहन की व्यवस्था करने की कोशिश की, लेकिन पिछले करीब एक सप्ताह से सड़क बंद होने के कारण कोई वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।
ऐसे में ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए महिला को डंडी-कंडी पर बैठाया और करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर बेंचा पुल तक पहुंचाया। वहां से हंस फाउंडेशन की एंबुलेंस के जरिए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) मोरी ले जाया गया।
ग्रामीणों के अनुसार, महिला का दो माह का शिशु भी है। सीएचसी मोरी के प्रभारी डॉ. नितेश रावत ने बताया कि महिला का उपचार जारी है और फिलहाल उनकी हालत स्थिर है।
कलाप गांव में भू-धंसाव से बढ़ा खतरा
मोरी के दूरस्थ कलाप गांव में हाल ही में हुई अतिवृष्टि के बाद स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है। गांव के नीचे लगातार भू-धंसाव हो रहा है, जबकि ऊपर की ओर से भूस्खलन और मलबा गिरने का सिलसिला जारी है।
गांव को जोड़ने वाले सड़क और पैदल मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पिछले दस दिनों से बिजली और पांच दिनों से पेयजल आपूर्ति बाधित है। इतना ही नहीं, बरसात के लिए आवश्यक तीन माह का राशन भी गांव तक नहीं पहुंच सका है।
उत्तरकाशी : सड़कें बंद, डंडी-कंडी बनी सहारा; बीमार महिला को 5 किमी पैदल ले जाकर पहुंचाया अस्पताल
ग्राम प्रधान मनवीर सिंह राणा ने बताया कि 27 जुलाई की आपदा के बाद गांव के अस्तित्व पर ही संकट गहरा गया है। कई मकानों के नीचे की जमीन धंस रही है, जबकि लगातार मलबा और पत्थर गिरने से लोग दहशत में हैं।
उन्होंने बताया कि गांव की शुभनी देवी का पैर फ्रैक्चर होने के बाद ग्रामीणों ने उन्हें करीब चार किलोमीटर तक क्षतिग्रस्त पगडंडी और उफनाते नालों के बीच पैदल सड़क तक पहुंचाया, जहां से आगे इलाज के लिए भेजा गया।
ग्राम प्रधान के मुताबिक, लगातार भू-धंसाव के कारण ग्रामीण कई दिनों से रातभर जागकर समय गुजारने को मजबूर हैं।
अस्थायी पुलिया बही, युवक ने पेड़ पकड़कर बचाई जान
बारिश का असर सांकरी-ओसला मोटर मार्ग पर भी देखने को मिला। गियांगाड नाले का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों द्वारा बनाई गई अस्थायी पुलिया बह गई।
इस दौरान ओसला निवासी खजान सिंह पुलिया के साथ बह गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह करीब 20 से 30 मीटर तक बह गए, लेकिन पेड़ की एक टहनी पकड़कर किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुए और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें पुरोला रेफर किया गया।
कई गांवों का टूटा संपर्क
अस्थायी पुलिया बहने के बाद ओसला, गंगाड़, ढाटमीर और पवाणी समेत कई गांवों का विकासखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
मजबूरी में ग्रामीण तेज बहाव वाले नाले को पार करने के लिए गिरे हुए पेड़ों का सहारा ले रहे हैं। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन ने दिए सड़कें खोलने के निर्देश
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अधिकारियों को सभी बंद ग्रामीण संपर्क मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विभिन्न स्थानों पर मशीनें लगाकर युद्धस्तर पर सड़कें खोलने का कार्य जारी है, ताकि प्रभावित गांवों तक जल्द राहत पहुंचाई जा सके और लोगों की आवाजाही बहाल हो सके।
मानसून ने बढ़ाई पहाड़ की मुश्किलें
उत्तरकाशी के दूरस्थ इलाकों में लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर पहाड़ों की मूलभूत समस्याओं को उजागर कर दिया है। सड़क संपर्क टूटने से मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई गांवों में बिजली, पेयजल और राशन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी प्रभावित हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द स्थायी सड़क, पुल और सुरक्षा कार्य नहीं किए गए, तो मानसून के दौरान ऐसी घटनाएं लगातार लोगों की जान और जीवन दोनों के लिए खतरा बनी रहेंगी।