देहरादून: उत्तराखंड गठन के 26 वर्ष बाद भी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों एवं देनदारियों का विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हो पाया है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र—तीनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने के बावजूद कई विभागों से जुड़ी हजारों करोड़ रुपये की देनदारियां अब भी लंबित हैं। राज्य सरकार लगातार उत्तर प्रदेश के साथ बातचीत का दावा कर रही है, लेकिन अब तक कई मामलों में अंतिम समाधान नहीं निकल सका है।
सबसे बड़ा मामला पेंशन देनदारियों का है, जबकि वन विकास निगम, सिंचाई विभाग, ऊर्जा क्षेत्र और अन्य परिसंपत्तियों से जुड़े वित्तीय विवाद भी वर्षों से लंबित हैं।
पेंशन मद में 2,261 करोड़ रुपये की देनदारी का दावा
उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 के दौरान उत्तर प्रदेश पर 2,261 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है, जो पेंशन मद से संबंधित बताई गई है।
सरकार का कहना है कि इस राशि का भुगतान अब तक नहीं हुआ है। इसके अलावा सिविल डिपॉजिट मद में 440 करोड़ रुपये की देनदारी भी लंबित बताई गई है। इन मामलों को लेकर शासन स्तर पर फिर से प्रस्ताव तैयार कर उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखने की तैयारी की जा रही है।
वन विकास निगम ने मांगा 20 साल का ब्याज
परिसंपत्तियों से जुड़े विवादों में उत्तराखंड वन विकास निगम का मामला भी प्रमुख है। निगम का दावा है कि उत्तर प्रदेश वन विकास निगम पर करीब 77 करोड़ रुपये के ब्याज की देनदारी बनती है।
बताया जा रहा है कि यह ब्याज करीब 20 वर्षों की अवधि का है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश वन विकास निगम को प्रस्ताव भेजने का विषय शासन स्तर पर विचाराधीन है।
सिंचाई और ऊर्जा विभाग के मामले भी लंबित
सिर्फ वन विभाग ही नहीं, बल्कि सिंचाई विभाग से जुड़ी परिसंपत्तियों पर भी दोनों राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। उत्तराखंड सरकार समय-समय पर अपना पक्ष उत्तर प्रदेश सरकार के सामने रखती रही है, लेकिन कई मामलों में अब भी विवाद बना हुआ है।
वहीं ऊर्जा विभाग के स्तर पर भी कुछ मामले टीएचडीसी (THDC) परियोजनाओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की ओर से परियोजनाओं में पूर्व में किए गए निवेश और उससे संबंधित वित्तीय दावों को लेकर रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
पुनर्गठन विभाग विभिन्न विभागों से जुड़े सभी लंबित मामलों का विवरण एकत्र कर समेकित रिपोर्ट तैयार कर रहा है, ताकि इन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखा जा सके।
सरकार बोली- बातचीत जारी, जल्द समाधान की उम्मीद
उत्तराखंड सरकार का कहना है कि परिसंपत्तियों और वित्तीय दावों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही है।
कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य सरकार लगातार उत्तर प्रदेश के साथ इन मामलों पर चर्चा कर रही है और उम्मीद है कि वर्षों से लंबित परिसंपत्ति विवाद का समाधान जल्द निकलेगा। उन्होंने कहा कि विवाद सुलझने के बाद उत्तराखंड को उसका बकाया धन मिल सकेगा।
विपक्ष ने सरकार को घेरा
दूसरी ओर विपक्ष और सरकार के आलोचक इस मुद्दे पर धामी सरकार को निशाने पर ले रहे हैं।
पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और केंद्र—तीनों जगह भाजपा की सरकार होने के बावजूद राज्य के हितों की रक्षा नहीं हो पाई है। उनका आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तराखंड को उसका अधिकार नहीं दिया और केंद्र सरकार ने भी इस मामले में कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने भी इस मुद्दे पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके कारण वर्षों बाद भी समाधान नहीं निकल पाया है।
26 साल बाद भी अधूरा पुनर्गठन
वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों, देनदारियों, संस्थानों और वित्तीय दावों के बंटवारे की प्रक्रिया शुरू हुई थी। हालांकि कई मामलों का समाधान हो चुका है, लेकिन अब भी कुछ बड़े वित्तीय विवाद लंबित हैं।
विशेष रूप से पेंशन देनदारियां, वन विकास निगम, सिंचाई परियोजनाएं, ऊर्जा परियोजनाएं और अन्य वित्तीय दावों को लेकर दोनों राज्यों के बीच अंतिम सहमति नहीं बन सकी है।
अब रिपोर्ट और प्रस्तावों पर टिकी उम्मीद
उत्तराखंड सरकार अब विभिन्न विभागों से लंबित दावों का अद्यतन ब्यौरा तैयार कर पुनर्गठन विभाग के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखने की तैयारी कर रही है।
यदि दोनों राज्यों के बीच इन मामलों पर सहमति बनती है, तो उत्तराखंड को हजारों करोड़ रुपये की लंबित राशि मिलने का रास्ता साफ हो सकता है। हालांकि, वर्षों से चले आ रहे इस विवाद का समाधान कब तक होगा, इस पर फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।