Uttarakhand News: ‘भुली योजना’ में महिलाओं का बढ़ा उत्साह, 1000 से ज्यादा आवेदन; बिना ब्याज मिलेगा 7.50 लाख तक कर्ज
देहरादून: उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके छोटे कारोबार को विस्तार देने के लिए शुरू की गई ‘भुली योजना’ को लेकर महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। योजना का लाभ लेने के लिए अब तक एक हजार से अधिक महिलाओं और महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया है।
ग्राम्य विकास विभाग की इस योजना के तहत चयनित महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को कारोबार बढ़ाने के लिए बिना ब्याज के 1.66 लाख रुपये से लेकर 7.50 लाख रुपये तक का सॉफ्ट लोन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
150 महिला उद्यमियों और SHG का होगा चयन
‘भुली योजना’ के तहत राज्यभर से महिला उद्यमियों अथवा महिलाओं के नेतृत्व में संचालित 150 स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाना है।
चयन प्रक्रिया में निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले समूहों को वित्तीय मदद के साथ-साथ तकनीकी सहयोग भी दिया जाएगा। इसके लिए तकनीकी रूप से दक्ष विशेषज्ञों की टीम चयनित लाभार्थियों को उनके कारोबार को बेहतर तरीके से संचालित करने और विस्तार देने में मदद करेगी।
इससे महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं मिलेगी, बल्कि उन्हें कारोबार के प्रबंधन, उत्पादन, बाजार और अन्य जरूरी पहलुओं में भी विशेषज्ञ सहयोग मिलने की उम्मीद है।
बिना ब्याज मिलेगा 1.66 से 7.50 लाख रुपये तक का कर्ज
योजना की सबसे खास बात यह है कि चयनित महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज के सॉफ्ट लोन उपलब्ध कराया जाएगा।
कारोबार और पात्रता के आधार पर यह सहायता 1.66 लाख रुपये से लेकर अधिकतम 7.50 लाख रुपये तक हो सकती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से छोटे स्तर पर कारोबार कर रहीं महिलाओं को अपने उद्यम का विस्तार करने में मदद मिलेगी।
सरकार का फोकस ऐसे महिला उद्यमों को बढ़ावा देना है, जो स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी योगदान कर सकें।
कारोबार में 15 प्रतिशत वृद्धि जरूरी
भुली योजना के तहत वित्तीय सहायता लेने वाले लाभार्थियों के सामने कुछ लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। योजना का लाभ लेने वाले चयनित संस्थानों को अपने व्यापार में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करनी होगी।
इसके अलावा उन्हें अपनी कारोबारी क्षमता के अनुसार तीन से चार स्थानीय लोगों को रोजगार देने की दिशा में भी काम करना होगा।
इसका मकसद केवल महिलाओं को कर्ज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उस आर्थिक सहायता को रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास से जोड़ना है।
पिथौरागढ़ की महिलाएं सबसे आगे
भुली योजना के लिए प्राप्त आवेदनों में सीमांत जनपद पिथौरागढ़ सबसे आगे है। यहां से अब तक 168 महिलाओं/स्वयं सहायता समूहों ने आवेदन किया है।
इसके बाद उत्तरकाशी से 161 और चमोली से 124 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इससे पहाड़ी जिलों की महिलाओं में योजना को लेकर दिखाई दे रही रुचि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिलेवार प्राप्त आवेदनों का आंकड़ा इस प्रकार है:
जिला |
आवेदन |
|---|---|
पिथौरागढ़ |
168 |
उत्तरकाशी |
161 |
चमोली |
124 |
चंपावत |
92 |
पौड़ी गढ़वाल |
71 |
नैनीताल |
69 |
टिहरी गढ़वाल |
66 |
रुद्रप्रयाग |
64 |
हरिद्वार |
56 |
अल्मोड़ा |
44 |
देहरादून |
41 |
उधम सिंह नगर |
24 |
बागेश्वर |
21 |