देहरादून। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी उत्तराखंड कांग्रेस में इस समय संगठनात्मक ढांचे को लेकर अंदरखाने बड़ी खींचतान चल रही है। पार्टी हाईकमान जहां छोटी, सशक्त और जिम्मेदारी तय करने वाली टीम बनाना चाहता है, वहीं प्रदेश स्तर पर पीसीसी में पद पाने के इच्छुक नेताओं की लंबी सूची बनने से गठन की प्रक्रिया लटक गई है।
हाईकमान का फोकस—छोटी लेकिन दमदार टीम कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि आगामी चुनावी मुकाबले के लिए ऊर्जावान, सक्रिय और जवाबदेह नेताओं की टीम तैयार की जाए। रणनीति यह है कि पद कम हों लेकिन हर पदाधिकारी की भूमिका स्पष्ट हो, ताकि संगठन चुनावी मोड में प्रभावी तरीके से काम कर सके।
कार्यकर्ताओं से ज्यादा ‘पद’ की चाह- सत्ता में वापसी के लिए मजबूत जमीनी कार्यकर्ताओं की जरूरत मानी जा रही है, लेकिन मौजूदा हालात में अधिकतर नेता संगठन में जिम्मेदारी लेने के बजाय पद चाहते हैं। यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) में शामिल होने के इच्छुक नेताओं की सूची लगातार लंबी होती जा रही है।
2022 के बाद नहीं हुआ पीसीसी का पुनर्गठन- पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के कार्यकाल में बनी कार्यकारिणी में 200 से अधिक पदाधिकारी थे। उसके बाद नेतृत्व परिवर्तन तो हुआ, लेकिन संगठनात्मक ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। पूर्व अध्यक्ष करण माहरा ने नई टीम बनाने की कोशिश की, मगर हाईकमान स्तर पर इसे अंतिम रूप नहीं मिल पाया और पुरानी टीम के सहारे ही लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव लड़े गए।
गोदियाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती—संतुलन हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस की कमान अब गणेश गोदियाल को सौंप दी है। उन्होंने 16 नवंबर 2025 को पदभार ग्रहण किया, लेकिन अभी तक नई पीसीसी घोषित नहीं हो सकी है। दिल्ली में कई दौर की बैठकों के बावजूद अंतिम सूची तय नहीं हो पाई है क्योंकि प्रदेश के लगभग सभी वरिष्ठ नेताओं ने अपने-अपने समर्थकों के नाम आगे बढ़ाए हैं।
छोटी टीम बनाम सियासी संतुलन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस नेतृत्व एक कॉम्पैक्ट और परिणाम देने वाली टीम चाहता है, लेकिन क्षेत्रीय, जातीय और गुटीय संतुलन साधना बड़ी चुनौती बन गया है। यही कारण है कि पीसीसी गठन में लगातार देरी हो रही है।
संभावित असर- संगठनात्मक मजबूती की प्रक्रिया धीमी, कार्यकर्ताओं में असमंजस की स्थिति,चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है असर