उत्तराखंड में बढ़ रहे ब्रेन ट्यूमर के मामले: क्या मोबाइल फोन बन रहा है खतरा? जानिए शुरुआती लक्षण और बचाव के उपाय
देहरादून। आधुनिक जीवनशैली में मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। हालांकि तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके बढ़ते उपयोग को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। विशेष रूप से ब्रेन ट्यूमर के बढ़ते मामलों ने चिकित्सकों और आम लोगों दोनों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 20 से 30 वर्ष की आयु के युवाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूक रहने की सलाह दे रहे हैं।
हर महीने बढ़ रहे नए मरीज
देहरादून स्थित Shri Mahant Indiresh Hospital के वरिष्ठ न्यूरो सर्जन Dr. Pankaj Arora के अनुसार, अस्पताल में हर महीने लगभग 20 नए ब्रेन ट्यूमर मरीज पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष पहले यह संख्या लगभग आधी थी। वर्तमान समय में हर सप्ताह 5 से 6 ब्रेन ट्यूमर सर्जरी की जा रही हैं, जो इस बीमारी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।
मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर: क्या है सच?
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेन ट्यूमर के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। इनमें आनुवंशिक कारण, पर्यावरणीय प्रभाव, रेडिएशन एक्सपोजर और जीवनशैली से जुड़े कारक शामिल हैं।
मोबाइल फोन से निकलने वाली विद्युत-चुंबकीय तरंगों (Electromagnetic Waves) को लेकर लंबे समय से शोध जारी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग मस्तिष्क की कोशिकाओं पर प्रभाव डाल सकता है। हालांकि अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों में मोबाइल फोन और ब्रेन ट्यूमर के बीच प्रत्यक्ष और निर्णायक संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है। इसलिए मोबाइल फोन को इस बीमारी का एकमात्र कारण मानना सही नहीं होगा।
इन शुरुआती लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
ब्रेन ट्यूमर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके लक्षण सामान्य बीमारियों जैसे दिखाई दे सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार यदि निम्नलिखित लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए—
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बार-बार या लगातार सिर दर्द होना
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अचानक दौरे (Seizures) पड़ना
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चक्कर आना और संतुलन बिगड़ना
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शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी महसूस होना
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कानों में लगातार झनझनाहट या आवाज आना
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धुंधला दिखाई देना या दृष्टि संबंधी समस्याएं
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याददाश्त में कमी या व्यवहार में बदलाव
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बोलने या समझने में कठिनाई