पांच मुख्यमंत्री देने वाले पौड़ी में विकास के दावों पर सवाल, बीमार महिला को कंधे पर उठाकर नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया

चौबट्टाखाल के डांगू मल्लाका गांव की तस्वीर ने खोली बदहाल सड़क-पुल व्यवस्था की पोल; ग्रामीण बोले- आज भी मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को पैदल रास्तों और नदी के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले को राज्य का वीवीआईपी जिला कहा जाता है। इस जिले ने उत्तराखंड को पांच मुख्यमंत्री, कई मंत्री और केंद्रीय स्तर के बड़े अधिकारी दिए हैं। मौजूदा समय में प्रदेश के स्वास्थ्य और लोक निर्माण विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने वाले मंत्री भी पौड़ी गढ़वाल से जुड़े हैं। इसके बावजूद जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सवाल खड़े कर रही है।

चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो इसी बदहाल व्यवस्था की तस्वीर दिखा रहा है। वीडियो में ग्रामीण एक बीमार महिला को कंधों पर उठाकर नदी पार करते और पैदल रास्ते से अस्पताल की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक सड़क नहीं होने के कारण मरीजों को सड़क तक पहुंचाने के लिए आज भी पालकी, डोली या कंधों का सहारा लेना पड़ता है।

वीवीआईपी जिले के ग्रामीण सड़क और पुल को तरसे

मामला पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल ब्लॉक के ग्राम डांगू मल्लाका का बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खतलगढ़ के ऊपर पुल नहीं होने के कारण बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए नदी पार करनी पड़ी और इसके बाद पैदल रास्ते से सड़क तक ले जाना पड़ा।

पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के मौसम में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसे में सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने का सीधा असर मरीजों और बुजुर्गों पर पड़ता है।

वायरल वीडियो में ग्रामीणों की यह मजबूरी एक बार फिर सामने आई है कि सड़क तक पहुंचने के लिए उन्हें मरीजों को कंधे पर उठाकर या डोली के सहारे ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।

60 वर्षीय लक्ष्मी देवी को नदी पार कर पहुंचाया अस्पताल

गांव की ग्राम प्रधान रेखा रावत के अनुसार गांव निवासी 60 वर्षीय लक्ष्मी देवी को सांस लेने में तकलीफ होने पर ग्रामीणों ने मिलकर उन्हें अस्पताल पहुंचाया। गांव में सड़क सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें कंधे पर उठाकर नदी पार करनी पड़ी।

ग्राम प्रधान ने बताया कि डांगू मल्लाका गांव में 200 से अधिक परिवार रहते हैं। सड़क नहीं होने के कारण मरीजों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी होती है।

उनके अनुसार ग्रामीणों को जंगल के रास्ते करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। वहीं पानी वाले रास्ते से सड़क की दूरी करीब एक किलोमीटर है। यह रास्ता अपेक्षाकृत आसान है, इसलिए ग्रामीण इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

ग्राम प्रधान रेखा रावत का बयान

“गांव निवासी 60 वर्षीय लक्ष्मी देवी को सांस लेने में तकलीफ होने पर ग्रामीणों ने मिलकर उन्हें नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया। गांव में 200 से अधिक परिवार रहते हैं, लेकिन सड़क सुविधा नहीं होने के कारण मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों को जंगल के रास्ते करीब दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार कर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। वहीं, पानी वाले रास्ते से सड़क की दूरी करीब एक किलोमीटर है और रास्ता अपेक्षाकृत आसान होने के कारण ग्रामीण इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं।”

– रेखा रावत, ग्राम प्रधान

सड़क और स्वास्थ्य सुविधा की तस्वीर पहली बार नहीं

चौबट्टाखाल क्षेत्र में सड़क सुविधा की बदहाली की तस्वीर पहली बार सामने नहीं आई है। इससे पहले कमलिया पल्ला गांव का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। उस वीडियो में सड़क नहीं होने के कारण एक व्यक्ति अपनी बीमार पत्नी को करीब छह से सात किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर ले जाता दिखाई दिया था।

अब डांगू मल्लाका गांव से सामने आए एक और वीडियो ने पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और संपर्क मार्गों की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दोनों मामलों में ग्रामीणों की ओर से लंबे समय से सड़क और संपर्क मार्ग की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है।

पौड़ी जिले से ही हैं पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज

ग्रामीणों की नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है कि चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र के विधायक सतपाल महाराज प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि करीब एक दशक से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद कई गांव आज भी सड़क और पुल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय स्तर पर सर्वे, कार्रवाई और आश्वासन की प्रक्रिया तो होती है, लेकिन धरातल पर अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं देता।

उनका सवाल है कि जब सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी गांवों तक नहीं पहुंच पा रही हैं तो पहाड़ के दूरस्थ इलाकों के लोगों को इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए आखिर कब तक इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा।

यूकेडी नेता बलवंत गुसाईं ने साधा निशाना

इस मामले को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल के नेता बलवंत गुसाईं ने पीडब्ल्यूडी मंत्री सतपाल महाराज पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि चौबट्टाखाल में सड़क के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें कोई नई या आश्चर्यजनक बात नहीं हैं।

उन्होंने भगवती तालिया का जिक्र करते हुए कहा कि जब सतपाल महाराज को ग्रामीणों ने वहां रोका था, तब भी इन्हीं गांवों की सड़क और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए गए थे।

बलवंत गुसाईं का बयान

“चौबट्टाखाल में सड़क के लिए ग्रामीणों के संघर्ष की तस्वीरें कोई नई या आश्चर्यजनक बात नहीं हैं। भगवती तालिया में जब सतपाल महाराज को ग्रामीणों ने रोका था, तब भी उन्होंने इन्हीं गांवों की सड़क और ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर सवाल उठाए थे। उस दौरान जनता की समस्याओं का संतोषजनक जवाब देने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर आंखें दिखाने वाला व्यवहार किया गया।”

– बलवंत गुसाईं, नेता यूकेडी

करीब 10 साल से विधायक, फिर भी सड़क के लिए संघर्ष

बलवंत गुसाईं ने कहा कि सतपाल महाराज करीब 10 वर्षों से क्षेत्र के विधायक हैं और वर्तमान में प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं। इसके बावजूद उनकी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीणों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में सड़क और पुल केवल आवागमन का साधन नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच के लिए भी बेहद जरूरी हैं।

स्वास्थ्य मंत्री भी पौड़ी के मूल निवासी

सड़क की समस्या के साथ ही ग्रामीणों की स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल भी पौड़ी के ही मूल निवासी हैं।

ऐसे में वायरल वीडियो ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पहाड़ के ग्रामीण कब तक मरीजों को कंधों पर उठाकर, नदी-नाले पार कर और पैदल रास्तों से अस्पताल पहुंचाने को मजबूर रहेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क सुविधा नहीं होने से सामान्य दिनों में भी परेशानी होती है, लेकिन बारिश के मौसम में स्थिति और गंभीर हो जाती है। किसी मरीज की हालत अचानक बिगड़ने पर उसे समय पर अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाता है।

कंधे पर उठाकर और नदी पार कर अस्पताल पहुंचाया

लक्ष्मी देवी को सांस लेने में परेशानी होने के बाद ग्रामीणों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की। सड़क सीधे गांव तक नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने उन्हें कंधे पर उठाया और नदी पार कर सड़क तक पहुंचाया।

ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि मरीज को जल्द से जल्द वाहन तक पहुंचाया जाए, ताकि अस्पताल में उपचार मिल सके।

ग्राम प्रधान के मुताबिक गांव के लोगों ने लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की है, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उनका कहना है कि सड़क बनने से गांव के 200 से अधिक परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और मरीजों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं को सबसे बड़ी राहत मिलेगी।

पीडब्ल्यूडी ने बताया- भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जारी

मामले में लोक निर्माण विभाग की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पीडब्ल्यूडी बैजरों के अधिशासी अभियंता लोकेश सारस्वत ने बताया कि सड़क निर्माण से पहले भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन को फाइल भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद सड़क की डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलने पर टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी और सड़क निर्माण का काम शुरू कराया जाएगा।

पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता लोकेश सारस्वत का बयान

“भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए शासन को फाइल भेजी गई है। अनुमति मिलने के बाद सड़क की डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके बाद वित्तीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। मुख्य सड़क से गांव की दूरी करीब तीन किलोमीटर है।”

– लोकेश सारस्वत, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी

सवाल वही- सड़क कब पहुंचेगी गांव तक?

पीडब्ल्यूडी की ओर से प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही गई है, लेकिन ग्रामीणों की समस्या तत्काल बनी हुई है। फिलहाल सड़क नहीं होने के कारण किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को पहले पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।

बारिश और नदी-नालों के बढ़े जलस्तर के बीच यह चुनौती और गंभीर हो जाती है। ऐसे में डांगू मल्लाका गांव से सामने आया वीडियो केवल एक बीमार महिला की मजबूरी नहीं, बल्कि पहाड़ के उन तमाम ग्रामीण इलाकों की तस्वीर है जहां आज भी सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच आसान नहीं है।

पांच मुख्यमंत्री देने वाले पौड़ी गढ़वाल जैसे जिले में बुनियादी सुविधाओं के लिए ग्रामीणों का इस तरह संघर्ष करना विकास के दावों के सामने बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि भूमि हस्तांतरण, डीपीआर और वित्तीय स्वीकृति की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी और गांव तक सड़क पहुंचाने का काम धरातल पर शुरू होगा।

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