देहरादून में जाम और प्रदूषण का समाधान बनेगी ई-बस सेवा, 100 नई इलेक्ट्रिक बसों से बदलेगा सार्वजनिक परिवहन का स्वरूप
पीएम-ई बस सेवा योजना के तहत देहरादून में बढ़ेगा इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा, परिवहन विभाग ने तैयार किया रूट प्लान; शहर के भीतर और आउटर क्षेत्रों में अलग-अलग क्षमता की बसों के संचालन पर जोर
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या और प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। परिवहन विभाग का जोर शहर में संचालित महानगर बस सेवा को आधुनिक और सुविधाजनक बनाने के साथ-साथ इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाने पर है। पीएम-ई बस सेवा योजना के तहत देहरादून में जल्द ही 100 और इलेक्ट्रिक बसें संचालित किए जाने की तैयारी है। वहीं, प्रदेश में प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत कुल 139 बसें प्राप्त हो रही हैं।
सरकार का मानना है कि यदि लोगों को आरामदायक, सुरक्षित और समयबद्ध सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जाए तो निजी वाहनों पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे एक ओर सड़कों पर वाहनों का दबाव घटेगा तो दूसरी ओर प्रदूषण में भी कमी आएगी। हालांकि, देहरादून में पहले से ही जाम की समस्या गंभीर है, ऐसे में बड़ी संख्या में बसों के संचालन को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा या सड़कों पर वाहनों की संख्या और बढ़ जाएगी।
देहरादून में सार्वजनिक परिवहन बेहतर करने पर जोर
देहरादून में ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या को देखते हुए परिवहन विभाग शहर की मौजूदा सिटी बस सेवा को आधुनिक बनाने के साथ ही नई बसों को सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। विभाग का लक्ष्य शहर में सार्वजनिक परिवहन को व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों के बजाय बसों का इस्तेमाल करें।
परिवहन विभाग शहर में संचालित सिटी बसों को हाईटेक बसों में तब्दील करने के साथ ही 137 बसों को भी जल्द शामिल करने की दिशा में काम कर रहा है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शहर की मौजूदा सड़कों और ट्रैफिक व्यवस्था के बीच इन बसों का संचालन किस तरह किया जाए, जिससे जनता को सुविधा मिले और जाम की समस्या भी न बढ़े।
जाम और प्रदूषण से राजधानीवासियों को राहत दिलाने की कोशिश
देहरादून में जाम की समस्या लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से समय-समय पर ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव और नए प्रयोग किए जाते हैं, लेकिन शहर की बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ रहे निजी वाहनों के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है।
वीकेंड और त्योहारी सीजन के दौरान स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। शहर की प्रमुख सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और कई बार लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। ऐसे में परिवहन विभाग सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के साथ ही इसे प्रदूषण मुक्त बनाने पर भी जोर दे रहा है।
देहरादून में वर्षों से सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से निजी सिटी बसों, मैजिक और विक्रम के भरोसे संचालित होती रही है। अब पीएम-ई बस सेवा योजना के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है।
देहरादून में 100 पीएम ई-बस चलाने की तैयारी
पीएम-ई बस सेवा योजना के तहत देहरादून शहर में 100 और इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान समय में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर के अलग-अलग रूटों पर 30 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जा रहा है।
इसके अलावा देहरादून में करीब 170 निजी सिटी बसें और लगभग 400 विक्रम/मैजिक संचालित हो रहे हैं। ऐसे में नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से पहले परिवहन विभाग मौजूदा व्यवस्था को भी व्यवस्थित करने पर जोर दे रहा है।
विभाग की कोशिश है कि निजी सिटी बसों को चरणबद्ध तरीके से हाईटेक बसों से रिप्लेस किया जाए। इससे पुरानी और अधिक प्रदूषण फैलाने वाली बसों की जगह आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल बसें सड़कों पर उतर सकेंगी। साथ ही यात्रियों को बेहतर और आरामदायक सफर की सुविधा मिलेगी।
शहर में 300 बसों के सार्वजनिक इस्तेमाल पर जोर
परिवहन विभाग देहरादून शहर में करीब 300 बसों को सार्वजनिक परिवहन के तौर पर इस्तेमाल करने की दिशा में काम कर रहा है। विभाग का मानना है कि शहर में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क मजबूत होने से लोग निजी वाहनों को छोड़कर बसों का इस्तेमाल करेंगे।
एक समय देहरादून में करीब 300 निजी सिटी बसों का संचालन होता था, लेकिन लगातार आर्थिक नुकसान के चलते करीब 130 निजी सिटी बस संचालकों ने अपने वाहनों को सड़कों से हटा लिया। वहीं, स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित 30 इलेक्ट्रिक बसों को लेकर भी लगातार घाटे की बात सामने आती रही है।
इसकी एक बड़ी वजह लोगों का सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त संख्या में इस्तेमाल नहीं करना माना जा रहा है। यही कारण है कि परिवहन विभाग अब नए सिरे से रूटों का निर्धारण करने पर जोर दे रहा है, ताकि बसें ऐसे मार्गों पर संचालित हों जहां यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके और लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।
मुख्य और संकरे मार्गों के लिए अलग-अलग क्षमता की बसें
परिवहन विभाग के अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि देहरादून में पहले करीब 300 गाड़ियां संचालित होती थीं। शहर की मौजूदा सड़कों की क्षमता और संरचना को देखते हुए बसों के संचालन की रणनीति में बदलाव किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि शहर के मुख्य मार्गों पर बड़ी बसें, यानी 25 से 30 सीटर बसें संचालित की जाएंगी, जबकि छोटे और संकरे मार्गों पर 15 सीटर तक की छोटी बसों का संचालन किया जाएगा। इसके लिए आरटीओ स्तर से रूट निर्धारित किए जाएंगे।
सनत कुमार सिंह ने बताया कि शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है और देहरादून का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में यदि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर नहीं किया गया तो लोग निजी वाहनों का अधिक इस्तेमाल करेंगे। इससे आने वाले समय में ट्रैफिक की समस्या और गंभीर हो सकती है।
एक बस में 30 लोग, सड़क पर कम होंगे वाहन
परिवहन विभाग का तर्क है कि सार्वजनिक परिवहन की संख्या बढ़ाने से सड़क पर वाहनों का दबाव कम किया जा सकता है। अगर एक बस में करीब 30 लोग यात्रा करते हैं तो उन 30 लोगों के लिए अलग-अलग निजी वाहनों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसके विपरीत यदि यही लोग अपने निजी वाहनों का इस्तेमाल करेंगे तो सड़क पर वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाएगी। इससे ट्रैफिक दबाव के साथ-साथ प्रदूषण भी बढ़ेगा।
इसी वजह से विभाग सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। वर्तमान समय में देहरादून में सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा आधार सिटी बसें हैं। सिटी बस सेवा को बढ़ावा देने के लिए कमर्शियल वाहनों में शामिल सिटी बसों का 100 प्रतिशत टैक्स पहले ही माफ किया जा चुका है।
परिवहन विभाग का कहना है कि यदि सिटी बसों का संचालन बेहतर तरीके से किया जाता है और रूटों को यात्रियों की जरूरत के अनुसार निर्धारित किया जाता है तो सार्वजनिक परिवहन जाम बढ़ाने के बजाय जाम और प्रदूषण की समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकता है।
परिवहन मंत्री ने बताया आउटर रूटों का प्लान
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत उत्तराखंड राज्य में 139 बसें प्राप्त हो रही हैं। इन बसों के संचालन के लिए रूट प्लान तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इन बसों का संचालन मुख्य रूप से आउटर क्षेत्रों में किया जाएगा। इसमें देहरादून से ऋषिकेश, हरिद्वार और रुड़की के रूट भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह है कि शहर के अंदर वाहनों का अत्यधिक दबाव न बढ़े और लोगों को शहर से बाहर के प्रमुख क्षेत्रों के लिए बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा मिल सके।
परिवहन मंत्री ने कहा कि शहर के आउटर क्षेत्रों में फिलहाल हाईटेक बसों और पर्याप्त स्टॉपेज की कमी है। सरकार इसी दिशा में व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रही है।
ई-मोबिलिटी पर सरकार का फोकस
उत्तराखंड सरकार अब ई-मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण अनुकूल बनाना और पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों पर निर्भरता कम करना है।
शहर में संचालित सिटी बसों को इलेक्ट्रिक या हाईटेक बसों में बदलने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी की व्यवस्था की जा रही है, ताकि सिटी बस संचालकों को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल वाहनों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण कम करने के साथ यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देने की भी उम्मीद है। सरकार का मानना है कि भविष्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जोड़ना शहरों के लिए जरूरी होगा।
क्या 100 नई बसों से घटेगा जाम?
देहरादून में 100 नई इलेक्ट्रिक बसें चलने के बाद ट्रैफिक पर उनका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इनका रूट निर्धारण और संचालन किस तरह किया जाता है। यदि नई बसों को मौजूदा सिटी बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के साथ व्यवस्थित तरीके से संचालित किया गया तो निजी वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।
वहीं, यदि बिना पर्याप्त रूट प्लानिंग और स्टॉपेज व्यवस्था के बड़ी संख्या में बसों का संचालन किया गया तो शहर की मौजूदा सड़कों पर अतिरिक्त दबाव भी बन सकता है। यही वजह है कि परिवहन विभाग मुख्य मार्गों, संकरे मार्गों और आउटर रूटों के लिए अलग-अलग क्षमता की बसों के संचालन की रणनीति पर काम कर रहा है।
कुल मिलाकर देहरादून में सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने की योजना सिर्फ नई बसें उतारने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य मौजूदा सिटी बस व्यवस्था को व्यवस्थित करना, निजी वाहनों पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और शहर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित करना है।
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह का बयान
“देहरादून शहर में पहले 300 गाड़ियां चलती थीं। ऐसे में सड़कों में कुछ कमियां जरूर हैं, जिसको देखते हुए यह व्यवस्था की गई है कि शहर के जो मुख्य मार्ग हैं उन मार्गों पर बड़ी गाड़ियां यानी 25 से 30 सीटर और जो छोटे या संकरे मार्ग हैं, वहां पर छोटी गाड़ियां यानी 15 सीटर तक का संचालन किया जाएगा। ऐसे में आरटीओ के स्तर से रूटों का निर्धारण किया जाएगा।”
– सनत कुमार सिंह, अपर परिवहन आयुक्त
परिवहन मंत्री प्रदीप बत्रा का बयान
“प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत उत्तराखंड राज्य में 139 बसें प्राप्त हो रही हैं। इनके संचालन के लिए रूट प्लान तैयार किया जा रहा है। इन बसों का संचालन आउटर क्षेत्रों में किया जाएगा। इसमें देहरादून से ऋषिकेश, हरिद्वार एवं रुड़की रूट शामिल है। ताकि शहर के अंदर अत्यधिक वाहनों का दबाव न हो, जिससे जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।”