देहरादून मास्टर प्लान में जुड़ा 3 से 4 फीसदी अतिरिक्त क्षेत्र, GIS से तय होगा शहर के भविष्य का विकास खाका

37,800 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान, आवासीय उपयोग के साथ परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं, व्यावसायिक और मनोरंजन क्षेत्रों के लिए भी तय किया गया भूमि उपयोग

देहरादून: राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में भविष्य के विकास को व्यवस्थित और नियोजित स्वरूप देने की कवायद तेज हो गई है। देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे GIS आधारित मास्टर प्लान में मौजूदा क्षेत्र के साथ करीब 3 से 4 फीसदी अतिरिक्त क्षेत्र भी शामिल किया गया है। नए मास्टर प्लान के जरिए आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक सुविधाओं, परिवहन, मनोरंजन और पर्यटन गतिविधियों के लिए भूमि उपयोग को अलग-अलग निर्धारित करने की योजना है।

एमडीडीए के वाइस चेयरमैन बंशीधर तिवारी के अनुसार, नए जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित मास्टर प्लान और जोनल डेवलपमेंट प्लान के माध्यम से पूरे प्राधिकरण क्षेत्र के विकास को दीर्घकालिक और व्यवस्थित दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है।

37,800 हेक्टेयर क्षेत्र को मास्टर प्लान में किया गया शामिल

प्रस्तावित मास्टर प्लान के नक्शे के अनुसार कुल 37,800 हेक्टेयर क्षेत्र को योजना क्षेत्र के तौर पर दर्शाया गया है। इसमें क्षेत्र की मौजूदा स्थिति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

मास्टर प्लान में कुल क्षेत्र के भीतर:

  • 9,872 हेक्टेयर वन क्षेत्र

  • 3,059 हेक्टेयर कैंटोनमेंट क्षेत्र

  • 17,916 हेक्टेयर विकसित क्षेत्र

  • 6,952 हेक्टेयर अविकास योग्य क्षेत्र

को अलग-अलग चिन्हित किया गया है।

इसका उद्देश्य केवल आबादी वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखकर योजना तैयार करना नहीं, बल्कि वन, कैंटोनमेंट, विकसित और अविकास योग्य क्षेत्रों की स्थिति को भी एक समग्र डिजिटल नक्शे में दर्ज करना है।

आवासीय क्षेत्र के लिए सबसे ज्यादा हिस्सेदारी

प्रस्तावित भूमि उपयोग वितरण में सबसे बड़ा हिस्सा आवासीय क्षेत्र के लिए रखा गया है। कुल विकास योग्य क्षेत्र में आवासीय उपयोग की हिस्सेदारी 58.43 फीसदी है।

इसके बाद भविष्य की यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग भूमि उपयोग निर्धारित किए गए हैं।

प्रस्तावित भूमि उपयोग में:

भूमि उपयोग प्रस्तावित हिस्सेदारी
आवासीय 58.43%
परिवहन 11.15%
सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक 9.42%
मिश्रित भूमि उपयोग 9.33%
मनोरंजन 5.98%
व्यावसायिक 4.28%
औद्योगिक 1.07%
पर्यटन 0.34%

इस तरह मास्टर प्लान में बढ़ती आबादी की आवासीय जरूरतों के साथ-साथ परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं, व्यापार, मनोरंजन और औद्योगिक गतिविधियों के लिए भी अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित करने का प्रयास किया गया है।

मौजूदा जोनल प्लान से आगे बढ़ेगा दायरा

नए मास्टर प्लान में मौजूदा जोनल डेवलपमेंट प्लान के अतिरिक्त क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। मानचित्र में इन अतिरिक्त क्षेत्रों को अलग से चिन्हित किया गया है।

प्रस्तावित दस्तावेज के अनुसार यह अतिरिक्त क्षेत्र कुल मास्टर प्लान क्षेत्र का लगभग 3 से 4 फीसदी है। इसके जुड़ने से नियोजित विकास का दायरा और व्यापक होने की उम्मीद है।

GIS तकनीक से एक ही डिजिटल मैप पर दिखेगा पूरा क्षेत्र

GIS आधारित मास्टर प्लान की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग भूमि उपयोग, विकसित क्षेत्र, परिवहन नेटवर्क, वन क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों को डिजिटल मैप पर चिन्हित किया जा सकता है।

एमडीडीए के वाइस चेयरमैन बंशीधर तिवारी के मुताबिक, GIS तकनीक के माध्यम से क्षेत्रवार विकास की योजना बनाने और अलग-अलग गतिविधियों के लिए उपयुक्त भूमि उपयोग तय करने में मदद मिलेगी।

उनके अनुसार, देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बढ़ती आबादी तथा निर्माण गतिविधियों के बीच इस तरह की डिजिटल योजना भविष्य में शहर के विस्तार को व्यवस्थित दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं पर भी फोकस

मास्टर प्लान में आवासीय क्षेत्र के अलावा परिवहन के लिए 11.15 फीसदी और सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए 9.42 फीसदी क्षेत्र प्रस्तावित किया गया है।

इससे संकेत मिलता है कि भविष्य के विकास में केवल नए आवासीय क्षेत्रों के विस्तार पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि बढ़ती आबादी के साथ परिवहन व्यवस्था और सार्वजनिक सुविधाओं की जरूरतों को भी योजना में जगह दी गई है।

इसके अलावा मिश्रित भूमि उपयोग, व्यावसायिक गतिविधियों, मनोरंजन और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी अलग-अलग हिस्सेदारी निर्धारित की गई है।

शहर के भविष्य के विस्तार को मिलेगी दिशा

देहरादून में पिछले कुछ वर्षों में आबादी और निर्माण गतिविधियों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

37,800 हेक्टेयर क्षेत्र को अलग-अलग श्रेणियों में चिन्हित करने और मौजूदा जोनल प्लान से अतिरिक्त 3 से 4 फीसदी क्षेत्र को शामिल करने से भविष्य के विकास के लिए एक व्यापक खाका तैयार करने की कोशिश की जा रही है।

मास्टर प्लान के लागू होने के बाद क्षेत्रवार विकास, भूमि उपयोग, परिवहन ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े फैसलों को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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