सिद्धपीठ कालीमठ में आस्था का सैलाब, मां कालीमाई की दिवारा यात्रा का भव्य आगाज; गांव-गांव मिलेगा आशीर्वाद

वेद ऋचाओं, ढोल-दमाऊं की थाप और मां के जयकारों से गूंजा कालीमठ; केदारघाटी के गांवों और तीर्थस्थलों में होगा डोली का भव्य स्वागत, सुख-समृद्धि की कामना के लिए उमड़ेंगे श्रद्धालु

रुद्रप्रयाग: सिद्धपीठ कालीमठ में सोमवार को आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। वेद ऋचाओं के गूंजते स्वर, ढोल-दमाऊं की थाप और मां काली के जयकारों के बीच भगवती कालीमाई की द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा का विधिवत शुभारंभ हुआ। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्धपीठ कालीमठ पहुंचे और मां भगवती के दर्शन कर सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

धार्मिक अनुष्ठानों और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवती कालीमाई की उत्सव डोली अगले पड़ाव के लिए रवाना हुई। यात्रा के पहले दिन मां की डोली नारायणकोटी गांव पहुंची, जहां ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा, ढोल-दमाऊं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भगवती कालीमाई का भव्य स्वागत किया।

डोली के गांव में पहुंचते ही पूरा क्षेत्र मां काली के जयकारों से गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। ग्रामीणों ने घर-घर से मां भगवती के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-शांति, समृद्धि तथा खुशहाली के लिए प्रार्थना की।

गांव-गांव पहुंचेगी मां कालीमाई की डोली

द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा के दौरान भगवती कालीमाई की डोली केदारघाटी के विभिन्न तीर्थस्थलों, धार्मिक स्थलों और गांवों का भ्रमण करेगी। यात्रा के दौरान जिन-जिन स्थानों पर मां की डोली पहुंचेगी, वहां ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां का स्वागत करेंगे।

धार्मिक मान्यता के अनुसार दिवारा यात्रा के दौरान मां भगवती अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि तथा खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। इसी आस्था के चलते ग्रामीण मां की डोली की अगवानी के लिए विशेष तैयारियां कर रहे हैं।

विजय कप्रवाण ने बताया यात्रा का महत्व

“द्वितीय चरण की दिवारा यात्रा के तहत भगवती कालीमाई की डोली केदारघाटी के विभिन्न तीर्थस्थलों, धार्मिक स्थलों और गांवों का भ्रमण करेगी। यात्रा के दौरान जहां-जहां मां भगवती की डोली पहुंचेगी, वहां ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां का स्वागत करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां भगवती अपने भक्तों की कुशलक्षेम पूछते हुए उन्हें सुख-समृद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद प्रदान करेंगी।”

– विजय कप्रवाण, उपाध्यक्ष, बदरी-केदार मंदिर समिति

वर्षों बाद आयोजित हो रही यात्रा को लेकर खास उत्साह

मंदिर समिति के सदस्य प्रह्लाद पुष्पवाण ने कहा कि दिवारा यात्रा को लेकर कालीमठ सहित पूरी केदारघाटी में विशेष उत्साह है। वर्षों बाद आयोजित हो रही इस धार्मिक यात्रा के प्रति ग्रामीणों में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्र के लोगों की आस्था और परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। गांवों में मां की डोली के पहुंचने का इंतजार श्रद्धालु बेसब्री से कर रहे हैं।

लोक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है दिवारा यात्रा

दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष लखपत राणा ने कहा कि दिवारा यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की लोक संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक भी है।

उन्होंने कहा कि मां की डोली जब गांव-गांव पहुंचती है तो पूरा क्षेत्र एकजुट होकर मां की अगवानी करता है। इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक संबंधों को भी मजबूती मिलती है।

यात्रा के महामंत्री सुरेशानंद गौड़ ने बताया कि दिवारा यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

डोली के स्वागत के लिए गांवों में तैयारियां

मां भगवती की डोली के स्वागत के लिए ग्रामीण अपने स्तर से तैयारियां कर रहे हैं। यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं के स्वागत और प्रसाद की व्यवस्था की जा रही है।

गांवों में लोग पारंपरिक तरीके से मां की अगवानी की तैयारी में जुटे हैं। कहीं पुष्पवर्षा की तैयारी है तो कहीं ढोल-दमाऊं के साथ डोली का स्वागत किया जाएगा। मां की डोली के गांव में पहुंचने पर श्रद्धालु दर्शन कर आशीर्वाद लेंगे और अपने परिवार तथा क्षेत्र की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करेंगे।

श्रद्धालुओं में बनी हुई है विशेष उत्सुकता

दिवारा यात्रा प्रभारी प्रकाश पुरोहित ने बताया कि भगवती कालीमाई के विभिन्न तीर्थस्थलों और गांवों के भ्रमण को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यता है कि मां भगवती के गांव-गांव भ्रमण से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि का संचार होता है। इसी आस्था के चलते ग्रामीण बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मां की डोली की अगवानी कर रहे हैं।

आने वाले दिनों में और बढ़ेगा धार्मिक उल्लास

यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, केदारघाटी में धार्मिक उल्लास और बढ़ने की संभावना है। विभिन्न पड़ावों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।

मां भगवती की डोली के हर पड़ाव पर ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत करेंगे। पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच श्रद्धालु मां का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

दिवारा यात्रा के माध्यम से क्षेत्र की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रयास भी किया जा रहा है। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर ग्रामीण अपनी परंपराओं के अनुरूप मां भगवती का स्वागत कर आस्था प्रकट कर रहे हैं।

सदियों पुरानी परंपरा को जीवंत रखने की पहल

कालीमठ की दिवारा यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ केदारघाटी की लोक संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। मां की डोली का गांव-गांव भ्रमण लोगों को अपनी जड़ों और पारंपरिक रीति-रिवाजों से जोड़ता है।

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि मां कालीमाई के आशीर्वाद से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी। इसी विश्वास के साथ ग्रामीण उत्साहपूर्वक यात्रा में भाग ले रहे हैं।

दिवारा यात्रा के आगे बढ़ने के साथ केदारघाटी में भक्ति और आस्था का रंग और गहरा होने वाला है। मां कालीमाई की डोली जहां-जहां पहुंचेगी, वहां श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर मां से क्षेत्र और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगेंगे।

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