केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग को लेकर ज्योतिर्मठ में पैनखंडा समुदाय का शक्ति प्रदर्शन, हजारों लोग सड़कों पर उतरे

चमोली। सीमांत क्षेत्र ज्योतिर्मठ में पैनखंडा समुदाय ने अपनी लंबे समय से लंबित केंद्रीय आरक्षण की मांग को लेकर विशाल जनसैलाब के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। समुदाय के लोगों ने जुलूस निकालकर केंद्र सरकार से तत्काल उन्हें केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल करने की मांग की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी देखने को मिली, जिससे पूरे क्षेत्र में आंदोलन का व्यापक असर नजर आया।

राज्य में आरक्षण मिला, लेकिन केंद्र में नहीं—युवाओं में रोष

समुदाय के लोगों का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2017 में राज्य सरकार ने पैनखंडा समुदाय को राज्य की आरक्षण सूची में शामिल किया था, जिसके तहत उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत 14 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
लेकिन केंद्रीय सेवाओं और केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में यह सुविधा न मिलने के कारण उनके प्रतिभाशाली युवा अखिल भारतीय स्तर की प्रतियोगिताओं और नौकरियों में पिछड़ रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सूची में शामिल होने के बावजूद केंद्रीय सूची में नाम न होना उनके साथ अन्याय है।

‘यह आरक्षण नहीं, हमारा अधिकार’—समुदाय की दो टूक

आंदोलन कर रहे प्रतिनिधियों ने कहा कि पैनखंडा समुदाय वर्षों से अपनी भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर इस हक की लड़ाई लड़ रहा है। उनका कहना है कि सीमांत और दुर्गम क्षेत्रों में रहने के कारण शिक्षा, संसाधन और रोजगार के अवसर पहले ही सीमित हैं, ऐसे में केंद्रीय आरक्षण न मिलने से उनकी नई पीढ़ी का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
समुदाय ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।

सरकार का ध्यान खींचने के लिए किया शक्ति प्रदर्शन

जुलूस के माध्यम से पैनखंडा समुदाय ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की कि अब वे अपने अधिकारों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक उन्हें केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कौन है पैनखंडा समुदाय?

उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के ज्योतिर्मठ ब्लॉक में निवास करने वाला पैनखंडा समुदाय राज्य का एक पिछड़ा वर्ग समुदाय है। जिले के करीब 58 गांवों में इस समुदाय की आबादी निवास करती है।
राज्य स्तर पर ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलने के बावजूद समुदाय की मुख्य मांग यह है कि उन्हें केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल किया जाए, ताकि उनके युवाओं को राष्ट्रीय स्तर पर समान अवसर मिल सकें।

सीमांत क्षेत्र को मुख्यधारा से जोड़ने की मांग

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीमांत क्षेत्रों के विकास, शिक्षा और रोजगार के समान अवसरों की लड़ाई भी है। उनका मानना है कि केंद्रीय सूची में शामिल होने से इस वर्ग के युवाओं को देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं और संस्थानों में उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।

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