नए खुलासे में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें उत्तराखंड के एक छात्र ने पैसों की जरूरत के चलते अपनी किडनी बेच दी। लेकिन तय रकम न मिलने पर उसने पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के कानपुर में चल रहे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पर्दाफाश हो गया।
पुलिस के मुताबिक, उत्तराखंड निवासी आयुष, जो एमबीए का छात्र है और साइबर एक्सपर्ट भी बताया जा रहा है, आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। इसी कारण उसने मेरठ के एक डॉक्टर के संपर्क में आकर ₹6 लाख में किडनी देने का सौदा किया। इसके बाद उसे एक नेटवर्क के जरिए कानपुर के अस्पताल तक पहुंचाया गया, जहां उसका ट्रांसप्लांट कराया गया।
हालांकि ऑपरेशन के बाद आयुष को पूरी रकम नहीं दी गई। बकाया पैसे न मिलने पर उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत ने पूरे मामले का खुलासा कर दिया और जांच के दौरान एक बड़े अवैध रैकेट का भंडाफोड़ हुआ।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह गरीब और जरूरतमंद लोगों से 8–9 लाख रुपये में किडनी खरीदता था और फिर जरूरतमंद मरीजों को 80–90 लाख रुपये तक में बेच देता था। इस धंधे में डॉक्टरों, अस्पताल स्टाफ और बिचौलियों की मिलीभगत पाई गई।
पुलिस ने इस मामले में अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कई डॉक्टर और एक बिचौलिया शामिल हैं। वहीं कुछ मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी पता चला है कि पिछले कुछ महीनों में इसी नेटवर्क के जरिए कई अवैध ट्रांसप्लांट किए गए थे।
यह मामला न सिर्फ अवैध अंग व्यापार के खतरनाक नेटवर्क को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आर्थिक मजबूरी किस तरह युवाओं को जोखिम भरे और गैरकानूनी फैसले लेने पर मजबूर कर सकती है।