हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में चार माह की मासूम बच्ची के अपहरण के मामले का पुलिस ने सफल खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में एक दंपत्ति और उनके सहयोगी कथित बाबा को गिरफ्तार करते हुए अपहृत बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी एक लड़के को बेचकर मोटी रकम कमाने की फिराक में थे, लेकिन गलती से उन्होंने एक बच्ची का अपहरण कर लिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Navneet Singh ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 28 मई को उत्तर प्रदेश के संभल निवासी पुष्पेंद्र ने रोड़ीबेलवाला चौकी पहुंचकर अपनी चार माह की बेटी के लापता होने की सूचना दी थी।
गंगा स्नान के लिए आए परिवार की बच्ची हुई थी गायब
पुलिस के अनुसार पीड़ित परिवार 27 मई को गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आया था। रात में परिवार विष्णु घाट के निकट हाथी पुल के पास एक पेड़ के नीचे सो गया। सुबह जागने पर चार माह की बच्ची गायब मिली। काफी तलाश के बाद भी जब बच्ची का कोई सुराग नहीं लगा तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
सीसीटीवी और बस-ट्रेन की कड़ियों से पहुंची पुलिस
बच्ची चोरी का सही समय स्पष्ट नहीं होने के कारण पुलिस ने अनुमानित समयावधि के दौरान क्षेत्र में मौजूद संदिग्ध लोगों की गतिविधियों की जांच शुरू की। जांच में एक संदिग्ध दंपत्ति सामने आया, जो पहले एक बच्चे के साथ विष्णु घाट क्षेत्र में घूमता दिखाई दिया और अगले दिन दो बच्चों के साथ बस में सफर करते हुए नजर आया।
बस चालक और परिचालक से पूछताछ में पता चला कि दोनों धामपुर में उतरे थे। इसके बाद पुलिस ने उनकी तलाश में धामपुर से हावड़ा तक के 65 रेलवे स्टेशनों पर जानकारी जुटाई, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
जांच का रुख बदला तो खुला राज
पुलिस ने इसके बाद संदिग्धों के हरिद्वार आने के रास्ते की पड़ताल शुरू की। जांच में पता चला कि दंपत्ति शिवालिक नगर क्षेत्र की ब्रह्मपुरी बस्ती से विष्णु घाट पहुंचे थे।
स्थानीय लोगों से पूछताछ में जानकारी मिली कि यह दंपत्ति अपने बच्चे के साथ झाड़-फूंक करने वाले एक बाबा की झोपड़ी में रह रहा था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने झोपड़ी पर दबिश दी और कथित बाबा सत्यपाल के साथ दंपत्ति को हिरासत में ले लिया। उनके पास से अपहृत बच्ची भी बरामद कर ली गई।
तीन लाख रुपये में लड़का बेचने की थी साजिश
पूछताछ में आरोपियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। दंपत्ति ने बताया कि उनके चार बच्चे हैं, जिनमें तीन लड़के और एक लड़की शामिल हैं।
महिला के एक रिश्तेदार ने उसे बताया था कि एक परिवार को बेटा चाहिए और यदि कोई लड़का उपलब्ध कराया जाए तो तीन लाख रुपये मिल सकते हैं। हालांकि दंपत्ति ने अपना बच्चा देने से इनकार कर दिया, लेकिन पैसे के लालच में उन्होंने यह जानकारी अपने परिचित सत्यपाल को दे दी।
बताया गया कि सत्यपाल ने ही उन्हें हरिद्वार जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल से बच्चा चोरी करने की सलाह दी थी।
लड़का समझकर चुरा ली बच्ची
योजना के तहत दंपत्ति अपनी छोटी बेटी को साथ लेकर 26 मई को हरिद्वार पहुंचे और एक दिन तक मौका तलाशते रहे। 28 मई की सुबह करीब चार बजे उन्होंने गहरी नींद में सो रहे परिवार के बीच से चार माह की बच्ची को उठाकर ले लिया।
बाद में जब उन्हें पता चला कि जिसे उन्होंने लड़का समझकर उठाया है, वह लड़की है, तो वे घबरा गए। इसके बाद वे बच्ची को लेकर धामपुर, लखनऊ होते हुए अपने गांव पहुंच गए।
अपनी बेटी को घर छोड़ने के बाद आरोपी अपहृत बच्ची को किसी अन्य व्यक्ति को बेचने की योजना बनाकर फिर हरिद्वार पहुंचे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें धर दबोचा।
पुलिस की सतर्कता से बच गई मासूम
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो बच्ची को कहीं और ले जाया जा सकता था। लगातार तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी फुटेज की जांच और विभिन्न राज्यों तक फैली पड़ताल के कारण पुलिस इस मामले का सफल खुलासा करने में कामयाब रही।
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। वहीं मासूम बच्ची को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
इस सफल कार्रवाई के बाद हरिद्वार पुलिस की तत्परता और पेशेवर जांच की सराहना की जा रही है।