चमोली। उत्तराखंड के चमोली जनपद से मानवता को झकझोर देने वाली एक घटना सामने आई है। जिले के रांगतोली गांव में गुरुवार सुबह बारिश के बीच एक नवजात शिशु नाले के किनारे संदिग्ध परिस्थितियों में जीवित अवस्था में मिला। समय रहते एक स्थानीय महिला की नजर बच्चे पर पड़ गई, जिसके बाद ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की सक्रियता से उसकी जान बचाई जा सकी। नवजात को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार जारी है। पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
गोशाला जा रही महिला की नजर पड़ी, तुरंत दी सूचना
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 5:30 बजे गांव की एक महिला रोज की तरह गोशाला की ओर जा रही थी। इसी दौरान गांव के आम रास्ते के पास स्थित नाले के किनारे उसकी नजर एक नवजात शिशु पर पड़ी, जो संदिग्ध परिस्थितियों में वहां पड़ा हुआ था।
घटना को देखकर महिला घबरा गई और उसने बिना देर किए इसकी सूचना ग्राम प्रधान को दी। सूचना मिलते ही गांव में हलचल मच गई और ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचने लगे।
ग्राम प्रधान और ग्राम प्रहरी पहुंचे मौके पर
सूचना मिलने के बाद ग्राम प्रधान संतोष गुसांई और ग्राम प्रहरी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि नवजात नाले के किनारे पड़ा हुआ है और उसकी स्थिति बेहद गंभीर प्रतीत हो रही थी।
ग्राम प्रधान संतोष गुसांई के अनुसार, जब उन्होंने बच्चे को ध्यान से देखा तो उसके मुंह में रबर का एक टुकड़ा फंसा हुआ था। उन्होंने तत्काल सावधानीपूर्वक रबर को बाहर निकाला। रबर हटाते ही बच्चे की सांसें चलती हुई महसूस हुईं, जिससे मौके पर मौजूद लोगों को राहत मिली।
इसके बाद बिना समय गंवाए पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस ने तत्काल अस्पताल पहुंचाया
सूचना मिलते ही चमोली कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बच्चे को भर्ती कर उपचार शुरू किया। फिलहाल नवजात चिकित्सकों की निगरानी में है और उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पुलिस ने शुरू की जांच
पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि नवजात का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है और चिकित्सकीय निगरानी में उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
उन्होंने बताया कि पुलिस ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि नवजात को वहां किसने छोड़ा, किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और इस घटना के पीछे क्या कारण रहे।
पुलिस आसपास के गांवों और क्षेत्र से जानकारी जुटा रही है तथा मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है। साथ ही स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना से जुड़े तथ्यों का जल्द खुलासा किया जा सके।
समय रहते बच गई मासूम की जान
यदि सुबह गोशाला जा रही महिला की नजर समय पर नवजात पर नहीं पड़ती और ग्रामीण तुरंत सक्रिय नहीं होते, तो लगातार हो रही बारिश और नाले के किनारे की परिस्थितियों में बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। ग्रामीणों की सतर्कता, ग्राम प्रधान की सूझबूझ और पुलिस की त्वरित कार्रवाई के कारण नवजात को समय रहते अस्पताल पहुंचाया जा सका।
अब सभी की निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं कि आखिर इस मासूम को ऐसी हालत में नाले के किनारे छोड़ने वाला कौन है और इसके पीछे की वास्तविक वजह क्या है।