हरिद्वार कांवड़ मेला: 2 करोड़ की ओर बढ़ा आस्था का सैलाब, वाटर एम्बुलेंस बनी कांवड़ियों के लिए जीवनरक्षक, अब तक 30 श्रद्धालुओं की बची जान

हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में आयोजित विश्व प्रसिद्ध कांवड़ मेले में आस्था का जनसैलाब लगातार उमड़ रहा है। गंगा जल लेने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से लाखों शिवभक्त हरिद्वार पहुंच रहे हैं। बुधवार (5 अगस्त) की शाम तक हरिद्वार आने वाले कांवड़ यात्रियों की संख्या 1 करोड़ 80 लाख के आंकड़े को पार कर चुकी है और यह संख्या तेजी से 2 करोड़ की ओर बढ़ रही है।

श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड भीड़ को देखते हुए पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, जल पुलिस और अन्य सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ लगातार मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं। इस बार मेले की सबसे बड़ी और प्रभावी व्यवस्था वाटर एम्बुलेंस (लाइफ बोट) साबित हो रही है, जिसने अब तक 25 से 30 कांवड़ियों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गंगा की तेज धारा के बीच जीवनरक्षक बनी वाटर एम्बुलेंस

हरिद्वार में गंगा के बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने इस बार विशेष रूप से वाटर एम्बुलेंस की व्यवस्था की है। इसे लाइफ बोट के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्रों की संयुक्त टीम चौबीसों घंटे तैनात रहती है।

जैसे ही किसी श्रद्धालु के गंगा में डूबने या गंभीर रूप से घायल अथवा अस्वस्थ होने की सूचना मिलती है, रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकालती है और वाटर एम्बुलेंस के माध्यम से तेजी से निकटतम सुरक्षित घाट तक पहुंचाती है। वहां पहले से तैयार खड़ी सड़क एम्बुलेंस मरीज को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाती है, जिससे इलाज में होने वाली देरी को काफी हद तक रोका जा रहा है।

ऐसे काम करती है वाटर एम्बुलेंस

कांवड़ मेले के दौरान घाटों के समीप रणनीतिक स्थानों पर लाइफ बोट तैनात की गई हैं। इन बोटों पर प्रशिक्षित रेस्क्यू कर्मी, सुरक्षा उपकरण और आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा संसाधन उपलब्ध रहते हैं।

यदि कोई कांवड़िया गंगा में डूबने लगता है या उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है, तो एसडीआरएफ और जल पुलिस की टीम तत्काल रेस्क्यू अभियान चलाकर उसे वाटर एम्बुलेंस में ले जाती है। इसके बाद उसे जिला अस्पताल के निकट स्थित घाट तक पहुंचाया जाता है, जहां पहले से मौजूद एम्बुलेंस के माध्यम से कुछ ही मिनटों में अस्पताल भेज दिया जाता है।

भीड़ के कारण सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाना होता है मुश्किल

एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवींद्र सजवाण ने बताया कि हरकी पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में यदि किसी श्रद्धालु की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है, तो भारी भीड़ के कारण सड़क मार्ग से अस्पताल पहुंचाने में काफी समय लग सकता है।

उन्होंने बताया कि पहले श्रद्धालु को घाटों पर स्थापित स्वास्थ्य शिविरों में प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यदि चिकित्सकीय जांच के बाद गंभीर स्थिति सामने आती है, तो उसे वाटर एम्बुलेंस के जरिए सीधे ओम घाट तक पहुंचाया जाता है, जहां से सड़क एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में जिला अस्पताल पहुंचा देती है। इस व्यवस्था से गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है और कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है।

सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण हैं कांगड़ा घाट और सीसीआर घाट

प्रशासन के अनुसार कांवड़ मेले के दौरान कांगड़ा घाट और सीसीआर घाट सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। इन स्थानों पर गंगा का बहाव तेज होने के साथ-साथ श्रद्धालुओं की संख्या भी अधिक रहती है।

अक्सर श्रद्धालु सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर गंगा के बीच तक चले जाते हैं, जिससे डूबने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर हाईवे और शहर के अंदर भारी भीड़ के कारण आपातकालीन स्थिति में सड़क एम्बुलेंस का तेजी से अस्पताल तक पहुंचना भी बड़ी चुनौती बन जाता है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने वाटर एम्बुलेंस की व्यवस्था को प्रभावी बनाया है, ताकि नदी मार्ग का उपयोग कर कम समय में गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा सके।

25 से 30 कांवड़ियों की बचाई जा चुकी है जान

एसडीआरएफ इंस्पेक्टर कवींद्र सजवाण ने बताया कि कांवड़ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ, जल पुलिस और आपदा मित्रों की संयुक्त टीमें लगातार घाटों पर तैनात हैं।

उन्होंने कहा कि अब तक 25 से 30 कांवड़ियों को डूबने या गंभीर स्थिति से सुरक्षित निकालकर उनकी जान बचाई जा चुकी है। आने वाले दिनों में कांवड़ यात्रियों की संख्या और बढ़ने की संभावना है, इसलिए सभी टीमें 24 घंटे अलर्ट मोड पर कार्य कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि विभाग का मुख्य उद्देश्य क्विक रिस्पांस टाइम के साथ हर आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाना है, ताकि किसी भी श्रद्धालु की जान जोखिम में न पड़े। प्रशासन लगातार अपील भी कर रहा है कि श्रद्धालु निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें, सुरक्षा निर्देशों का पालन करें और गंगा की तेज धारा में अनावश्यक रूप से आगे न जाएं।

सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की विशेष नजर

कांवड़ मेले को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, एसडीआरएफ, जल पुलिस तथा अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से लगातार निगरानी कर रही हैं। घाटों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल, मेडिकल टीमें, रेस्क्यू उपकरण और आपदा प्रबंधन संसाधन तैनात किए गए हैं, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित और सुगम बनी रहे।

प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे कांवड़ यात्रा अपने चरम की ओर बढ़ रही है, वैसे-वैसे सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और रेस्क्यू व्यवस्थाओं को भी और अधिक मजबूत किया जा रहा है, जिससे हर श्रद्धालु सुरक्षित रूप से गंगाजल लेकर अपने गंतव्य तक पहुंच सके।

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