हाईकोर्ट सख्त: प्रमुख वन सचिव और PCCF (HoFF) को अवमानना नोटिस जारी

नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अपने आदेशों की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख वन सचिव आर.के. सुधांशु और प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट (हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स) आर.के. मिश्रा को अवमानना नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने दोनों अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ में हुई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिजय नेगी ने न्यायालय को बताया कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कार्य कर चुके प्रसिद्ध शोधकर्ता सुबीर मारियो चोफिन के संवेदनशील और हाई-रिजोल्यूशन शोध उपकरणों को वापस करने के संबंध में न्यायालय ने पूर्व में स्पष्ट आदेश जारी किए थे, लेकिन अब तक उनका पालन नहीं किया गया।

आदेश के बावजूद नहीं लौटाए गए उपकरण

अधिवक्ता के अनुसार, न्यायालय ने 13 मार्च 2026 को संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया था कि शोधकर्ता के उपकरण वापस किए जाएं। इसके बाद अवमानना याचिका दायर होने पर 27 मार्च 2026 को भी न्यायालय ने उपकरण लौटाने का आदेश दोहराया था।

इसके बावजूद कई माह बीत जाने के बाद भी शोधकर्ता को उनके उपकरण वापस नहीं सौंपे गए। न्यायालय ने इसे आदेशों की अवहेलना मानते हुए प्रमुख वन सचिव और PCCF (HoFF) के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी कर दिया।

12 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त 2026 निर्धारित की है। साथ ही राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अगली तारीख तक अनुपालन रिपोर्ट अथवा अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करें।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा

हाईकोर्ट की इस कार्रवाई के बाद वन विभाग और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में देरी को लेकर अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होने की संभावना जताई जा रही है।

गौरतलब है कि न्यायालय समय-समय पर सरकारी विभागों को अपने आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश देता रहा है। ऐसे मामलों में अवमानना नोटिस को न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर कदम माना जाता है।

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