देहरादून | उत्तराखंड कैबिनेट के 18 अहम फैसले: मधुमक्खी पालन नीति को मंजूरी, परिवहन, शिक्षा और कुंभ व्यवस्था में बड़े बदलाव

Pushkar Singh Dhami की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई उत्तराखंड कैबिनेट बैठक में कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में राज्य के परिवहन, शिक्षा, वन, शहरी विकास और कुंभ मेला व्यवस्थाओं से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए, जिनका सीधा असर आम जनता, युवाओं और स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा।

कैबिनेट बैठक के बाद सचिव मुख्यमंत्री शैलेश बगोली ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार ने कई नीतिगत बदलावों को मंजूरी दी है, जिनमें नई योजनाओं के साथ-साथ पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार भी शामिल है।

आबकारी नीति में व्यय दर 6% निर्धारित की गई थी, जिसके अनुरूप वाणिज्य कर विभाग ने अपनी नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी।

परिवहन विभाग के तहत बसों की खरीद को मंजूरी दी गई। पहले 100 बसों की अनुमति थी, लेकिन जीएसटी दर 28% से घटकर 18% होने के बाद अब 109 बसें खरीदी जाएंगी।

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली 2016 में संशोधन को मंजूरी।वन दरोगा की आयु सीमा 21 से 35 वर्ष तय की गई।

-वन आरक्षी की आयु सीमा 18 से बढ़ाकर 25 वर्ष की गई।

-जिला सैनिक कल्याण अधिकारी को अब सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।-

उत्तराखंड अल्पसंख्यक अधिनियम 2025 पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है।

कक्षा 1 से 8 तक के 452 मदरसों को अब जिला स्तर से मान्यता मिलेगी।

कक्षा 9 से 12 तक के लगभग 52 मदरसों को उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता लेनी होगी। इस संबंध में जल्द अध्यादेश लाया जाएगा।

प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) अब एक वर्ष तक ही वैध मानी जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप विशेष शिक्षा शिक्षकों की अर्हता तय करने वाली नियमावली को मंजूरी।

सहायक अध्यापकों के लिए सेवा नियमावली को स्वीकृति।

लोक निर्माण विभाग (लोनिवि): हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में जेई भर्ती से जुड़े मामलों की जानकारी कैबिनेट के संज्ञान में लाई गई।

वर्कचार्ज कर्मियों से जुड़े निर्णय पर हाईकोर्ट के स्टे की जानकारी दी गई।

डी श्रेणी के ठेकेदारों को अब 1 करोड़ की जगह 1.5 करोड़ रुपये तक के कार्य मिल सकेंगे।

मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना का लाभ अब 21 अशासकीय कॉलेजों तक बढ़ाया गया।

वन सीमा क्षेत्रों में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति को मंजूरी। इससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ेगी और मानव-हाथी संघर्ष में कमी आने की उम्मीद है। वन सीमा मौन पालन मधुमक्खी आधारित आजीविका एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष नियमावली 2026 को भी स्वीकृति दी गई।

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