उत्तराखंड की खूबसूरत फूलों की घाटी पर्यटकों के लिए खुली, सितंबर तक दिखेगी फूलों की बहार

उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी (Valley of Flowers National Park) आज से पर्यटकों के लिए खोल दी गई है। हिमालय की गोद में बसी यह अद्भुत घाटी प्रकृति प्रेमियों, ट्रेकर्स और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं मानी जाती। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह घाटी हर साल लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। घाटी खुलते ही यहां पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है और स्थानीय पर्यटन कारोबार में भी उत्साह का माहौल है।

हर वर्ष जून महीने की शुरुआत में फूलों की घाटी को पर्यटकों के लिए खोला जाता है। इस साल भी 1 जून से घाटी में प्रवेश शुरू कर दिया गया है। यह राष्ट्रीय उद्यान 31 अक्टूबर तक या मौसम खराब होने और बर्फबारी शुरू होने तक पर्यटकों के लिए खुला रहेगा। मानसून के आगमन के साथ ही घाटी में रंग-बिरंगे फूल खिलने लगते हैं, जो जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान अपने पूरे शबाब पर होते हैं।

करीब 12,995 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह घाटी लगभग 87.5 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है। यहां ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता (Blue Poppy), कोबरा लिली सहित 500 से अधिक दुर्लभ और विदेशी प्रजातियों के फूल खिलते हैं। फूलों से सजी पूरी घाटी एक विशाल रंगीन कालीन जैसी दिखाई देती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक पहुंचते हैं।

फूलों की घाटी तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को गोविंदघाट से करीब 13 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर घांघरिया पहुंचना पड़ता है। इसके बाद घांघरिया से लगभग 3 किलोमीटर का ट्रेक कर घाटी के प्रवेश द्वार तक पहुंचा जाता है। घाटी के भीतर पर्यटकों को केवल दिन के समय रहने की अनुमति होती है और सूर्यास्त से पहले वापस लौटना अनिवार्य होता है।

फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान, नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व के अंतर्गत आता है। यहां दुर्लभ वनस्पतियों के साथ-साथ रंग-बिरंगी तितलियां, औषधीय जड़ी-बूटियां, प्राकृतिक झरने और हिमालयी वन्य जीवन भी देखने को मिलता है। घाटी के बीचोंबीच बहने वाली पुष्पावती नदी और दूर तक फैले ग्लेशियर इसकी सुंदरता को और भी आकर्षक बना देते हैं। बर्फ से ढके ऊंचे पहाड़ और हरियाली से घिरी यह घाटी पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने पर्यटकों से अपील की है कि वे घाटी की स्वच्छता बनाए रखें और पर्यावरण संरक्षण के नियमों का पालन करें। प्लास्टिक का उपयोग न करने और प्राकृतिक संपदा को नुकसान न पहुंचाने की भी सलाह दी गई है।

फूलों की घाटी के खुलने से स्थानीय होटल व्यवसायियों, ट्रेक गाइड, पोर्टर और दुकानदारों को भी रोजगार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। चारधाम यात्रा के साथ-साथ अब फूलों की घाटी भी उत्तराखंड पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बन गई है।

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