देश में सरकारी तंत्र की हालत और भ्रष्टाचार की कहानियां किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं लगतीं। एक तरफ अफसरशाही के अजब-गजब कारनामे, दूसरी तरफ चूहों की शराब प्रेमी बिरादरी। कुछ ऐसा ही ताज़ा मामला मध्य प्रदेश और झारखंड से सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।
मध्य प्रदेश: एक घंटे की बैठक में उड़ गए काजू-बादाम—समोसे-रसगुल्ले रहे बोनस!
मामला है शहडोल जिले की मदवाही पंचायत का, जहां ‘बोरी बंधन’ कार्यक्रम के नाम पर हुई एक घंटे की बैठक में अधिकारियों ने ऐसा जलवा दिखाया कि ग्रामीण दंग रह गए। बैठक में कलेक्टर केदार सिंह, एसडीएम, जिला पंचायत अधिकारी सहित कुल 14 अधिकारी शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों ने महज़ 60 मिनट में 14 किलो काजू-बादाम चट कर दिए। इतना ही नहीं, बैठक में 210 समोसे, 150 रसगुल्ले और 45 किलो नमकीन भी परोसे गए।
वहीं दूसरी ओर, गांव के लोगों को सिर्फ खिचड़ी परोसी गई। स्थानीय ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा— “हमें खिचड़ी मिली और साहब लोग मावा-मिठाई में मगन रहे।” अब सवाल ये है कि क्या किसी सरकारी बैठक में इतनी मात्रा में मेवा-मिठाई की आवश्यकता थी? या ये सरकारी खर्च पर अफसरों की मौजमस्ती थी?
झारखंड: चूहों ने गटक ली 802 बोतल स्कॉच, ठेकेदार बोला—”सर, बहुत चूहे हैं!”
अब रुख करते हैं धनबाद (झारखंड) की ओर, जहां का एक मामला तो बिल्कुल फिल्मी है। यहां नए वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले आबकारी विभाग ने जब गोदाम में शराब स्टॉक का मिलान किया, तो पाया कि 802 बोतल स्कॉच गायब है। जवाब में ठेकेदार ने बताया—
“सर, यहां चूहे बहुत हैं… वो बोतलें उन्होंने ही चट कर दीं!”
जांच में पता चला कि कई बोतलों के ढक्कनों में छेद थे और कुछ बोतलें पूरी खाली भी मिलीं। अब आबकारी विभाग की ओर से ठेकेदार से भरपाई वसूली की तैयारी की जा रही है।
क्या कहें? गजब है ये देश!
चाहे वो अफसरों द्वारा सरकारी बैठकों को ‘मेवा भोज’ में बदलना हो, या फिर चूहों द्वारा अंग्रेज़ी शराब के भंडार का ‘साफ’ किया जाना—ये घटनाएं देश में बेखौफ भ्रष्टाचार और हद दर्जे की लापरवाही को उजागर करती हैं।
गांववालों की हालत देखकर एक कहावत याद आती है—
“ऊपर वाला सब देख रहा है… लेकिन नीचे वाले तो अब मेवा देख रहे हैं!”
क्या वाकई चूहे शराब पीते हैं? क्या अधिकारी सच में एक घंटे में 14 किलो मेवा चटा सकते हैं? इन सवालों का जवाब चाहे जो हो, लेकिन ये तय है कि गजब के हाल हो गए हैं अधिकारी जी के!