वक्फ संपत्तियों में कथित गड़बड़ियों की जांच तेज, गढ़वाल कमिश्नर ने 10 दिन में रिपोर्ट मांगी; अनियमितता मिलने पर होगी सख्त कार्रवाई

देहरादून: उत्तराखंड में वक्फ संपत्तियों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की जांच को लेकर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। लंबे समय से लंबित जांच रिपोर्टों पर नाराजगी जताते हुए गढ़वाल मंडल आयुक्त कार्यालय ने संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं। करोड़ों रुपये मूल्य की वक्फ संपत्तियों से जुड़े इस मामले को गंभीर मानते हुए समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया गया है।

जांच में देरी पर कमिश्नर कार्यालय की नाराजगी

गढ़वाल कमिश्नर कार्यालय ने देहरादून के जिलाधिकारी को भेजे पत्र में स्पष्ट कहा है कि शिकायतों के आधार पर जांच कर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जानी थी, लेकिन अब तक जांच आख्या नहीं भेजी गई। इससे पूरे प्रकरण के निस्तारण में अनावश्यक देरी हो रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी लंबित मामलों की जांच पूरी कर 10 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

करोड़ों की वक्फ संपत्तियों पर उठे सवाल

उत्तराखंड सहित देशभर में वक्फ बोर्ड के अधीन बड़ी संख्या में भूमि और अन्य संपत्तियां हैं। समय-समय पर इन संपत्तियों पर अवैध कब्जे, रिकॉर्ड में हेरफेर और संपत्तियों के दुरुपयोग के आरोप सामने आते रहे हैं। उत्तराखंड में भी कई महत्वपूर्ण वक्फ परिसंपत्तियों से जुड़े दस्तावेज गायब होने और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद शासन स्तर पर जांच के आदेश जारी किए गए थे।

शादाब शम्स ने उठाया था मामला

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने शासन को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि वक्फ बोर्ड की कई महत्वपूर्ण संपत्तियों से संबंधित मूल दस्तावेज कार्यालय से गायब हैं। उनका कहना था कि इससे संपत्तियों के वास्तविक रिकॉर्ड और उनके प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ सीबीआई जांच की भी मांग की थी।

चार जिलों से मांगी गई है रिपोर्ट

जांच के तहत देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे अपने-अपने जिलों में वक्फ संपत्तियों का राजस्व अभिलेखों और अन्य सरकारी रिकॉर्ड से मिलान कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं रिकॉर्ड में हेरफेर, फर्जीवाड़ा या अवैध कब्जे जैसी अनियमितताएं तो नहीं हुई हैं।

अनियमितता मिलने पर होगी कानूनी कार्रवाई

कमिश्नर कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है तो ऐसे मामलों को लैंड फ्रॉड समन्वय समिति के समक्ष रखा जाएगा, ताकि संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

डीएम ने जांच में तेजी का दिया भरोसा

देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कहा है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है। निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट कमिश्नर कार्यालय को भेजी जाएगी।

अब सभी की निगाहें जिलाधिकारियों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद वक्फ संपत्तियों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी और यदि गड़बड़ियों की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा।

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