1930 हेल्पलाइन को किया जाएगा और प्रभावी, ई-जीरो एफआईआर सिस्टम होगा मजबूत, साइबर ठगी के पीड़ितों को त्वरित सहायता और धन वापसी पर रहेगा विशेष फोकस
देहरादून। उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में गृह विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साइबर अपराधों की समीक्षा बैठक करते हुए प्रदेश में स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (S4C) की स्थापना की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस केंद्र को शीघ्र अधिसूचित (नोटिफाई) किया जाए, ताकि राज्य में साइबर अपराधों की रोकथाम और जांच व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।
बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना से केंद्र सरकार, राज्य सरकार और जनपद स्तर की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे साइबर अपराधों की जांच में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर राहत उपलब्ध कराना संभव होगा।
सभी साइबर पुलिस स्टेशनों को किया जाएगा मजबूत
मुख्य सचिव ने प्रदेश के सभी साइबर पुलिस स्टेशनों की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की बदलती प्रकृति को देखते हुए पुलिस तंत्र को आधुनिक तकनीकों और पर्याप्त संसाधनों से लैस करना आवश्यक है। इसके लिए आवश्यक मानव संसाधन और तकनीकी सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
1930 हेल्पलाइन का रिस्पॉन्स टाइम होगा कम
बैठक में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि कॉल सेंटर में मैनपावर बढ़ाकर शिकायतों के निस्तारण की गति तेज की जाए। उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि शिकायत समय पर दर्ज हो जाए तो ठगी गई राशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए हेल्पलाइन का रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम किया जाना जरूरी है।
ई-जीरो एफआईआर और सीसीटीएनएस के एकीकरण पर जोर
मुख्य सचिव ने प्रदेश में ई-जीरो एफआईआर सिस्टम को और मजबूत बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि दर्ज होने वाली सभी ई-जीरो एफआईआर को शत-प्रतिशत नियमित एफआईआर में परिवर्तित किया जाए। साथ ही, इस प्रणाली का क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) के साथ तेजी से एकीकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि मामलों की निगरानी और जांच अधिक प्रभावी ढंग से हो सके।
साइबर ठगी के पीड़ितों तक पुलिस खुद पहुंचे
मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि जानकारी के अभाव में अधिकांश लोग साइबर ठगी का शिकार होने के बाद समय पर शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। इसके कारण वे मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अपनी धनराशि वापस पाने का अवसर भी खो देते हैं। उन्होंने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि वह सक्रिय भूमिका निभाते हुए पीड़ितों तक स्वयं पहुंचे और उन्हें शिकायत दर्ज कराने तथा धन वापसी की प्रक्रिया में हरसंभव सहायता उपलब्ध कराए।
व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि जनजागरूकता का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस विभाग शिकायत निवारण मॉड्यूल (GRM) और धन वापसी की प्रक्रिया के बारे में लोगों को लगातार जागरूक करे। इसके लिए मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों का व्यापक उपयोग किया जाए, ताकि लोग साइबर ठगी से बचने के उपाय जान सकें और किसी घटना की स्थिति में तुरंत सही कदम उठा सकें।
समयबद्ध शिकायत निस्तारण और साइबर कमांडो बढ़ाने के निर्देश
बैठक में मुख्य सचिव ने शिकायत निवारण मॉड्यूल (GRM) पर प्राप्त सभी शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा प्रदेश में साइबर कमांडो की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि तकनीक के लगातार बदलते स्वरूप के साथ पुलिस बल को भी आधुनिक कौशल से लैस करना समय की आवश्यकता है, ताकि साइबर अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
बैठक में सचिव शैलेश बगौली, अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. वी. मुरूगेशन, पुलिस महानिरीक्षक डॉ. नीलेश आनन्द भरणे, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह तथा अपर सचिव गृह तृप्ति भट्ट सहित गृह एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।