मरीज की मौत पर मैक्स अस्पताल पर ₹10 लाख जुर्माना, डॉक्टर सस्पेंड उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल का ऐतिहासिक फैसला

देहरादून:
उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने चिकित्सकीय लापरवाही के एक गंभीर मामले में ऐतिहासिक और नजीर पेश करने वाला निर्णय सुनाया है। मसूरी डायवर्जन रोड स्थित मैक्स अस्पताल में इलाज के दौरान एक मरीज की मौत के मामले में काउंसिल ने अस्पताल प्रबंधन पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है और इलाज कर रहे मुख्य चिकित्सक का पंजीकरण दो माह के लिए निलंबित कर दिया है। यह कदम राज्य के सभी निजी अस्पतालों को स्पष्ट संदेश देता है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा

गंभीर चूक में मरीज की मौत

यह मामला 7 अप्रैल 2025 का है जब कर्नल अमित कुमार दोउली की पत्नी बिन्देश्वरी देवी को मैक्स अस्पताल के न्यूरोसर्जरी वार्ड में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, मरीज की हालत गंभीर होने के बावजूद समय पर उचित इलाज और आवश्यक निर्णय नहीं लिए गए, जिससे उसकी हालत बिगड़ती चली गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
आरोप है कि ‘गोल्डन ऑवर’ यानी इलाज के सबसे संवेदनशील शुरुआती घंटे में चिकित्सकीय सतर्कता और प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया, जिससे यह दुर्घटना हुई।

शिकायत के बाद शुरू हुई जांच

पत्नी की मौत के बाद कर्नल अमित कुमार ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों के खिलाफ उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू हुई।

जांच में उजागर हुई लापरवाही

मेडिकल काउंसिल की नैतिकता, अनुशासन एवं पंजीकरण समिति ने मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार दस्तावेज, ट्रीटमेंट नोट्स और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी उपलब्ध साक्ष्यों की गहन समीक्षा की।
जांच में यह साफ पाया गया कि डॉ. आनंद मोहन ठाकुर, डॉ. मुकेश बिष्ट और डॉ. अपूर्वा रंजन द्वारा निर्धारित मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया। समिति ने रिपोर्ट में इस लापरवाही को घोर उपेक्षा और पेशेवर लापरवाही करार दिया।

काउंसिल ने उठाए सख्त कदम

  • डॉ. आनंद मोहन ठाकुर (पंजीकरण संख्या 8540) का पंजीकरण दो माह के लिए निलंबित कर दिया गया है। इस दौरान वे किसी भी अस्पताल, नर्सिंग होम या निजी क्लिनिक में चिकित्सकीय प्रैक्टिस नहीं कर सकेंगे।

  • मैक्स अस्पताल प्रबंधन को मृतका के पति को ₹10 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

निजी अस्पतालों के लिए सख्त संदेश

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब अक्सर बड़े निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली जाने के आरोप लगते रहे हैं। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल का यह फैसला स्पष्ट करता है कि चिकित्सा पेशे में जवाबदेही और मरीज के अधिकार सर्वोपरि हैं

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