अल्मोड़ा का देवलीखान बनेगा ‘मशरूम विलेज’, 22.5 लाख से 10 यूनिट लगेंगी, किसानों की आय में आएगी बड़ी छलांग

अल्मोड़ा पहाड़ों में खेती के नए मॉडल को बढ़ावा देने की दिशा में अल्मोड़ा जिले से एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हवालबाग ब्लॉक के देवलीखान गांव को अब “मशरूम विलेज” के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिला योजना के तहत स्वीकृत 22.5 लाख रुपये की धनराशि से यहां 10 आधुनिक मशरूम उत्पादन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिससे ग्रामीण किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है।

उद्यान विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह योजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य गांव स्तर पर स्वरोजगार के अवसर तैयार करना और किसानों को परंपरागत खेती से हटकर उच्च आय वाली फसलों की ओर प्रेरित करना भी है। पहाड़ी क्षेत्रों में सीमित भूमि और मौसम की चुनौतियों के बीच मशरूम उत्पादन को एक बेहतर विकल्प माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कम जगह, कम पानी और कम समय में अच्छा मुनाफा संभव है।

विभाग का अनुमान है कि इन 10 उत्पादन इकाइयों के जरिए किसान सालाना लगभग 37 हजार किलोग्राम मशरूम का उत्पादन कर सकेंगे। इस उत्पादन से गांव के किसानों को कुल मिलाकर लगभग 56 लाख रुपये की वार्षिक आय होने की संभावना जताई गई है। यानी एक यूनिट से औसतन 3750 किलोग्राम मशरूम उत्पादन और करीब 5.62 लाख रुपये तक की कमाई संभव बताई जा रही है। यह आय पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना अधिक मानी जा रही है।

योजना के तहत किसानों को 90 प्रतिशत तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर किसान भी इस उद्यम से जुड़ सकें। इसके अलावा उद्यान विभाग की ओर से मशरूम उत्पादन के लिए आवश्यक कम्पोस्ट, बीज और वैज्ञानिक तकनीक पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। विशेषज्ञ किसानों को उत्पादन, भंडारण और विपणन से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दे रहे हैं, ताकि वे बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्ता वाला उत्पादन कर सकें।

मशरूम विलेज योजना के समानांतर जिले में मशरूम कम्पोस्ट खाद वितरण कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। जिला योजना के तहत किसानों को 50 प्रतिशत सब्सिडी पर कम्पोस्ट उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक 72 किसानों को 72 टन मशरूम कम्पोस्ट खाद वितरित की जा चुकी है। विभाग का दावा है कि इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं और किसानों का रुझान तेजी से मशरूम उत्पादन की ओर बढ़ रहा है।

अल्मोड़ा जिले में मशरूम उत्पादन धीरे-धीरे किसानों के लिए एक मजबूत स्वरोजगार साधन बनता जा रहा है। कम लागत, कम जोखिम और तेज उत्पादन चक्र के कारण युवा किसान भी इस क्षेत्र में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इससे ग्रामीण पलायन रोकने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

मुख्य उद्यान अधिकारी अल्मोड़ा डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि यह विभाग की एक नई और महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों को पोषण सुरक्षा के साथ-साथ स्थायी आय का साधन उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि देवलीखान गांव में 10 मशरूम उत्पादन इकाइयों की स्थापना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

देवलीखान को “मशरूम विलेज” के रूप में विकसित किए जाने की यह पहल पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका मॉडल के लिए एक मिसाल बन सकती है।

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