देहरादून/उत्तरकाशी गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण को लेकर महीनों से चली आ रही पर्यावरणीय बहस के बीच एक बड़ा निर्णय सामने आया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और बार्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) के बीच सहमति बनने के बाद अब हाईवे की चौड़ाई 12 मीटर से घटाकर 11 मीटर कर दी गई है। इस संशोधन के साथ सड़क निर्माण के लिए काटे जाने वाले पेड़ों की संख्या में भारी कमी आई है। पहले जहां 6,822 पेड़ कटने थे, अब केवल 1,413 पेड़ ही काटने की अनुमति होगी।
बीआरओ फिलहाल गंगोत्री हाईवे के लिए संशोधित डीपीआर (डिज़ाइन परियोजना रिपोर्ट) तैयार कर रहा है, जिसे अंतिम रूप देकर केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
1,200 से अधिक पेड़ शिफ्ट किए जाएंगे
बीआरओ कमांडर राज किशोर सिंह ने बताया कि 1,413 पेड़ काटने के साथ ही 1,202 देवदार व अन्य प्रजाति के पेड़ों को ट्रांसप्लांट किया जाएगा। आधुनिक तकनीक के आधार पर इन्हें दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा ताकि जंगल का नुकसान न्यूनतम हो।
साथ ही सड़क के एलाइनमेंट में भी बदलाव किया गया है। नदी की ओर सुरक्षा दीवार बनाकर सड़क को चौड़ा किया जाएगा, ताकि पहाड़ी दिशा के पेड़ों को काटने की जरूरत न पड़े।
चारधाम परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है यह मार्ग
गंगोत्री हाईवे भारत-चीन सीमा की ओर जाने वाला एक रणनीतिक मार्ग है और केंद्रीय सरकार की महत्वाकांक्षी चारधाम सड़क परियोजना का प्रमुख हिस्सा है। उत्तरकाशी जिले के चुंगी बड़ेथी से भैरव घाटी तक लगभग 90 किलोमीटर हिस्से को पांच चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण में भैरव घाटी से झाला तक 15 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण प्रस्तावित था, जिसका खर्च 321 करोड़ रुपये आंका गया था। लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों के बाद डीपीआर को संशोधित करना पड़ा।
पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
देवदार के पेड़ों की अत्यधिक कटाई को लेकर स्थानीय पर्यावरण संगठनों ने पहले वाली योजना पर कड़ा विरोध जताया था। उनका कहना था कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ काटने से हाईवे क्षेत्र में पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न हो जाएगा। वहीं कुछ स्थानीय ग्रामीण सड़क चौड़ी होने के पक्ष में थे, क्योंकि इससे यातायात सुगम होगा और पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा मिलेगा। नई प्रस्तावित योजना दोनों पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से इसे एक पॉजिटिव कदम माना जा रहा है।