नैनीताल।Ashish Naithani 3 जून को Uttarakhand High Court से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। उनके सम्मान में मुख्य न्यायाधीश की अदालत में दोपहर 3:30 बजे ‘फुल कोर्ट रेफरेंस’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी और अधिवक्ता उन्हें औपचारिक विदाई देंगे।
डेढ़ साल का कार्यकाल, लेकिन फैसले बने मिसाल
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी 9 जनवरी 2025 को प्रथम जिला जज से पदोन्नत होकर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नियुक्त हुए थे। लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कई संवेदनशील और जटिल मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय दिए, जिन्हें न्यायपालिका में उल्लेखनीय माना जा रहा है।
संपत्ति कुर्की मामले में दिया अहम फैसला
न्यायमूर्ति नैथानी ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि केवल किसी कथित अपराधी से रिश्तेदारी होना संपत्ति कुर्क करने का आधार नहीं हो सकता। उन्होंने गैंगस्टर एक्ट के तहत हरिद्वार जिला प्रशासन द्वारा जारी कुर्की आदेशों को निरस्त करते हुए कहा कि कार्रवाई ठोस साक्ष्यों और कानूनी आधार पर ही होनी चाहिए।
दुष्कर्म मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी
एक आर्मी जवान के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म मामले को निरस्त करते हुए उन्होंने कहा कि आपसी सहमति से बने संबंधों में बाद में शादी से इनकार करना स्वतः दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि आपराधिक कानून का इस्तेमाल व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए नहीं होना चाहिए।
भ्रष्टाचार और बुलडोजर कार्रवाई मामलों में भी दिए अहम आदेश
एम्स ऋषिकेश भ्रष्टाचार मामले में उन्होंने आरोपी प्रोफेसर की याचिका खारिज कर जांच को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ किया। वहीं विकासनगर में बस्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए प्रभावित लोगों को सुनवाई का अवसर देने पर जोर दिया।
साक्ष्यों के आधार पर न्याय पर दिया बल
किच्छा डकैती कांड और पॉक्सो अधिनियम से जुड़े मामलों में भी न्यायमूर्ति नैथानी ने स्पष्ट किया कि न्याय केवल अनुमानों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों पर आधारित होना चाहिए।
वर्क चार्ज कर्मचारियों के मामले में सुनवाई
Public Works Department Uttarakhand में कार्यरत वर्क चार्ज कर्मचारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ न्यायमूर्ति Manoj Kumar Tiwari की एकलपीठ ने कर्मचारियों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारियों को नया प्रत्यावेदन देने के निर्देश दिए। मामला दैनिक श्रमिक के रूप में दी गई सेवाओं को पेंशन और ग्रेच्युटी में जोड़ने से संबंधित था।
स्वर्गाश्रम नगर पंचायत अनियमितता मामले में भी सुनवाई
Swargashram नगर पंचायत में कथित करोड़ों की अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta और न्यायमूर्ति Subhash Upadhyay की खंडपीठ ने राज्य सरकार और नगर पंचायत से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति आशीष नैथानी का कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उनके फैसलों ने न्यायपालिका में निष्पक्षता, संवेदनशीलता और कानून की मजबूती की स्पष्ट छाप छोड़ी है।