नैनीताल: उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अधिवक्ता के खिलाफ सोशल मीडिया में धमकी भरे कमेंट किए जाने के मामले में आज एस.एस.पी. प्रह्लाद नारायण मीणा ने न्यायालय को अवगत कराया कि संबंधित अधिवक्ता को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता को किसी मुकदमे की पैरवी करने से रोका नहीं जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उन्हें धमकाकर या डराकर उनके कर्तव्यों से विमुख नहीं किया जा सकता।
इससे पहले अदालत ने एस.एस.पी. को यह भी निर्देश दिए थे कि सोशल मीडिया में किए गए धमकी भरे कमेंट्स को तत्काल डिलीट करवाया जाए, ताकि इस तरह की आपत्तिजनक गतिविधियां आगे न फैलें और अधिवक्ता तथा उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
मामले के अनुसार, अधिवक्ता के खिलाफ सोशल मीडिया पर इसलिए धमकी भरे कमेंट किए गए थे क्योंकि उन्होंने एक विशेष और संवेदनशील मामले की पैरवी की थी। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि कानून का तकाजा है कि हर व्यक्ति को न्याय मिले और इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका बेहद अहम होती है। यदि उन्हें धमकाया जाएगा तो यह पूरी न्याय व्यवस्था के लिए खतरा होगा।
हाईकोर्ट ने दोहराया कि किसी भी अधिवक्ता को अपने पेशेवर दायित्व निभाने से रोका नहीं जा सकता। अदालत ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि समाज में यह संदेश जाए कि कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।