देहरादून: लंबे इंतजार, सियासी अटकलों और लगातार चल रही चर्चाओं के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पूरी कैबिनेट तैयार कर ली है। इस विस्तार के साथ ही धामी ने उत्तराखंड की राजनीति में एक अहम रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है। अब वे राज्य के उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों में शामिल हो गए हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री समेत 12 सदस्यों वाली पूर्ण कैबिनेट का गठन किया है।
खास बात यह है कि इससे पहले यह रिकॉर्ड केवल विजय बहुगुणा के नाम था, जिन्होंने वर्ष 2012 में 11 कैबिनेट मंत्रियों के साथ सरकार चलाई थी। अब धामी ने न सिर्फ इस रिकॉर्ड की बराबरी की है, बल्कि दूसरी बार पूर्ण कैबिनेट बनाकर इसे और मजबूत कर दिया है।
दो बार पूरी टीम बनाने वाले पहले मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री धामी की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने दो अलग-अलग कार्यकाल में पूर्ण कैबिनेट का गठन किया है। धामी सरकार के पहले कार्यकाल में भी 11 कैबिनेट मंत्री थे, जबकि दूसरे कार्यकाल की शुरुआत भले ही 8 मंत्रियों से हुई थी, लेकिन अब विस्तार के बाद संख्या फिर से 11 तक पहुंच गई है।
राजनीतिक अस्थिरता के बीच बड़ा फैसला
बीते कुछ समय से प्रदेश में कैबिनेट विस्तार को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही थीं। कई नाम सामने आ रहे थे और संगठन से लेकर सरकार तक मंथन चल रहा था। ऐसे माहौल में यह विस्तार न सिर्फ प्रशासनिक संतुलन स्थापित करने वाला कदम माना जा रहा है, बल्कि 2027 के चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
उत्तराखंड में कैबिनेट का इतिहास
अगर राज्य के अब तक के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो अलग-अलग सरकारों में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
पहली निर्वाचित सरकार नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व में बनी थी, जिसमें 9 कैबिनेट मंत्री थे। इसके बाद भुवन चंद्र खंडूरी की पहली सरकार में भी 9 मंत्री रहे, जबकि रमेश पोखरियाल निशंक की सरकार में यह संख्या घटकर 7 रह गई।
खंडूरी के दूसरे कार्यकाल में केवल 6 मंत्री ही कैबिनेट में शामिल रहे। इसके बाद बहुगुणा सरकार ने 11 मंत्रियों के साथ अब तक का सबसे बड़ा कैबिनेट बनाया। हरीश रावत की सरकार में 9 मंत्री रहे, जबकि त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में यह संख्या घटकर 6 रह गई।
इसके बाद तीरथ सिंह रावत की सरकार में 8 मंत्री रहे। फिर धामी के पहले कार्यकाल में 11 मंत्रियों के साथ एक बार फिर पूर्ण कैबिनेट देखने को मिली।
अब पूरी तरह संतुलित नजर आ रही सरकार
धामी सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरुआत में 8 मंत्री ही शामिल थे। बाद में परिस्थितियों के चलते संख्या घटकर 6 रह गई थी। लेकिन अब ताजा विस्तार के बाद कैबिनेट पूरी क्षमता के साथ खड़ी नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार न केवल प्रशासनिक कार्यों को गति देगा, बल्कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को साधने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
2027 की तैयारी का संकेत
कैबिनेट का यह विस्तार सिर्फ प्रशासनिक जरूरत नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी का भी स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। पूरी टीम के साथ सरकार अब अधिक आक्रामक तरीके से काम करने के मूड में दिख रही है।
इस तरह, पांच साल के लंबे इंतजार के बाद बनी यह पूर्ण कैबिनेट उत्तराखंड की राजनीति में एक नए चरण की शुरुआत मानी जा रही है।