देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर राजधानी देहरादून में एक बार फिर जनआवाज़ बुलंद हुई। परेड ग्राउंड के बाहर अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले आयोजित महापंचायत में विभिन्न राजनीतिक दलों, राज्य आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों ने भाग लिया। महापंचायत का मुख्य स्वर मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग रहा।
विपक्षी दलों और संगठनों की भागीदारी
महापंचायत में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के घटक दलों के प्रतिनिधियों के साथ कई सामाजिक संगठनों की मौजूदगी रही। वक्ताओं ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
सीबीआई जांच की प्रक्रिया पर उठे सवाल
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान ने कहा कि सीबीआई जांच की आधार एफआईआर को लेकर गंभीर सवाल हैं। उनका कहना था कि जांच अंकिता के माता-पिता की तहरीर पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने मांग उठाई कि जिन लोगों पर साक्ष्य मिटाने के आरोप हैं, उन्हें भी जांच के दायरे में लाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस व्यक्ति की शिकायत पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है, उसका अंकिता के परिवार या आंदोलन से सीधा संबंध नहीं रहा, इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी जरूरी है।
अन्य वक्ताओं ने भी उठाई निगरानी की मांग
महापंचायत में शामिल शिबा सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कहा कि जांच का आधार पीड़ित परिवार की शिकायत होनी चाहिए। उन्होंने हत्याकांड के कथित मोटिव और तथ्यों को पूरी तरह सामने लाने की मांग की।
भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि सरकार ने आंदोलन के दबाव में सीबीआई जांच की घोषणा तो की, लेकिन इसमें देरी हुई। उन्होंने कहा कि महापंचायत में शामिल सभी संगठनों ने एक स्वर में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की।
आंदोलन आगे भी रहेगा जारी
संयुक्त संघर्ष मंच से जुड़े प्रतिनिधियों ने संकेत दिए कि महापंचायत में लिए गए निर्णयों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। वक्ताओं ने कहा कि न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।