उत्तराखंड। राज्य गठन के बाद से ही उत्तराखंड की पहचान को लेकर लगातार बहस होती रही है। कभी इसे “ऊर्जा प्रदेश” बनाने की बात उठी तो कभी “पर्यटन राज्य” के रूप में विकसित करने की परिकल्पना सामने आई। हालांकि, लंबे समय तक इन अवधारणाओं पर ठोस और निर्णायक पहल नहीं हो सकी। लेकिन अब बदलते समय और तेज़ी से विकसित होते बुनियादी ढांचे के बीच यह साफ दिखने लगा है कि उत्तराखंड धीरे-धीरे एक सशक्त पर्यटन राज्य के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
हाल ही में देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना केवल एक सड़क नहीं, बल्कि एक “आर्थिक और पर्यटन गलियारा” है। उनके अनुसार, इस एक्सप्रेसवे से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि राज्य में रोजगार और पर्यटन के नए द्वार भी खुलेंगे।
यह एक्सप्रेसवे उत्तराखंड के लिए कई मायनों में गेमचेंजर साबित हो सकता है। दिल्ली से देहरादून के बीच की दूरी भले ही सीमित रूप से कम हुई हो, लेकिन समय में भारी कमी आई है। जहां पहले यह सफर 4 से 5 घंटे में तय होता था, वहीं अब इसे करीब ढाई घंटे में पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
इसके साथ ही राज्य में प्रस्तावित रोपवे परियोजनाएं और देहरादून से मसूरी के लिए नया मार्ग पर्यटन को और गति देने वाले हैं। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे निर्माण की योजना से तीर्थ पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। पहले ही ऑल वेदर रोड परियोजना के बाद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा चुकी है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi भी बुनियादी ढांचे को विकास की रीढ़ मानते हैं। उनका मानना है कि सड़कों का जाल किसी भी राज्य के भविष्य को तय करता है। यही कारण है कि उनके नेतृत्व में उत्तराखंड में सड़क, रेल और अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं को तेज़ी से आगे बढ़ाया गया है।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन, चारधाम ऑल वेदर रोड, और रोपवे जैसी परियोजनाएं राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रही हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद न केवल यात्रा सुविधाजनक होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।
हालांकि, एक्सप्रेसवे पर लगाए गए टोल टैक्स को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। एक तरफ जहां यह यात्रा को तेज और आरामदायक बनाता है, वहीं दूसरी ओर टोल शुल्क आम यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। बावजूद इसके, समग्र रूप से देखा जाए तो यह परियोजना राज्य के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उत्तराखंड अब योजनाओं और घोषणाओं के दौर से आगे बढ़कर वास्तविक बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। यदि इसी गति से बुनियादी ढांचे और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तराखंड देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर लेगा।