ब्रह्म मुहूर्त में खुले चतुर्थ केदार रुद्रनाथ धाम के कपाट, हिमालय में गूंजे भोलेनाथ के जयकारे
Rudranath Temple के कपाट सोमवार को ब्रह्म मुहूर्त में वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। अब भगवान रुद्रनाथ आगामी छह माह तक अपने मूल धाम में विराजमान रहेंगे।

Chamoli जिले में स्थित यह पवित्र धाम पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में विशेष महत्व रखता है। यहां भगवान शिव के ‘एकानन स्वरूप’ यानी मुख रूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि पूरे उत्तर भारत में यह एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है, जहां भगवान शिव के मुख दर्शन होते हैं। इसी कारण बाबा रुद्रनाथ को “एकानन भोलेनाथ” के नाम से भी जाना जाता है।
सोमवार को दोपहर 12:45 बजे आयोजित कपाटोद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग शामिल हुए। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चारण, पूजा-अर्चना और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के बीच बाबा रुद्रनाथ के जयकारों से हिमालय की वादियां गूंज उठीं।
हिमालय की दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित रुद्रनाथ धाम अपनी रहस्यमयी आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सौंदर्य और कठिन यात्रा मार्ग के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की पवित्र रुद्रनाथ यात्रा भी औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
