आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर हाईकोर्ट सख्त, बच्चों की सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिव से तलब किया जवाब

नैनीताल। उत्तराखंड में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और बच्चों पर हो रहे हमलों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने मुख्य सचिव सहित संबंधित विभागों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से विस्तृत जवाब मांगा है और स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा अदालत में प्रस्तुत किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका पर सुनवाई की। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा 19 मई 2026 को “City Hounded by Strays, Kids Pay Price” शीर्षक से दिए गए निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है।

बच्चों की सुरक्षा पर जताई गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि प्रदेश में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों से बच्चों की जान और सुरक्षा पर लगातार खतरा बढ़ रहा है। अदालत ने इस मुद्दे को केवल नगर निकायों तक सीमित न मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य के मुख्य सचिव, संबंधित विभागों के सचिव, भारत सरकार और एनएचएआई 7 अगस्त 2026 तक या उससे पहले अपने-अपने अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) अदालत में दाखिल करें।

सभी विभागों से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट

अदालत ने निर्देश दिए हैं कि हलफनामों में यह स्पष्ट किया जाए कि आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए अब तक क्या-क्या कदम उठाए गए हैं, भविष्य की क्या कार्ययोजना है और बच्चों व आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कौन-कौन से उपाय किए जा रहे हैं।

अगली सुनवाई 10 अगस्त को

मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से मुख्य केंद्रीय सरकारी अधिवक्ता सुनीति भट्ट, राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता पी.एस. बिष्ट तथा एनएचएआई की ओर से अधिवक्ता नरेश पंत अदालत में उपस्थित रहे।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त 2026 निर्धारित की है। उस दिन अदालत यह समीक्षा करेगी कि सभी संबंधित विभागों और अधिकारियों ने निर्धारित समय के भीतर अपने अनुपालन हलफनामे दाखिल किए हैं या नहीं।

प्रशासन की जवाबदेही तय होगी

हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को अदालत के समक्ष यह बताना होगा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या पर नियंत्रण के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत के निर्देशों से स्पष्ट है कि बच्चों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

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