देहरादून ग्रीन बिल्डिंग की सुस्त रफ्तार पर डीएम सख्त, कार्यदायी संस्था को फटकार; जांच के आदेश

40.5 प्रतिशत ही पूरा हुआ निर्माण कार्य, 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड करने पर जवाब तलब; लापरवाही मिलने पर जिम्मेदारी तय करने और वसूली के निर्देश

देहरादून: उत्तराखंड की पहली इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग के निर्माण की धीमी रफ्तार को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। परियोजना की समीक्षा के दौरान निर्धारित गति के अनुरूप काम नहीं होने पर जिलाधिकारी आशीष चौहान ने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। समीक्षा में सामने आया कि परियोजना का अब तक महज 40.5 प्रतिशत भौतिक कार्य ही पूरा हो पाया है।

डीएम ने परियोजना में हो रही देरी को गंभीरता से लेते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) के मुख्य अभियंता को निर्माण कार्य की जांच कर देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए। डीएम ने स्पष्ट किया कि जांच में यदि किसी अधिकारी या संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जरूरत पड़ने पर सरकारी धन की वसूली की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी।

21 करोड़ रुपये होल्ड करने पर मांगा जवाब

समीक्षा बैठक के दौरान परियोजना से जुड़ी 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड किए जाने का मामला भी सामने आया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था से जवाब तलब किया।

डीएम ने कहा कि जब परियोजना के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध है तो इसके बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी रहना गंभीर विषय है। उन्होंने कार्यदायी संस्था को स्पष्ट किया कि भवन निर्माण को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना उसकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण स्थल पर पर्याप्त मैनपावर, मशीनरी और निर्माण सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि काम में तेजी लाई जा सके और परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।

कई महत्वपूर्ण काम अब तक शुरू नहीं

समीक्षा के दौरान परियोजना के निर्माण से जुड़े कई ऐसे कार्य भी सामने आए, जिन्हें जून तक शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन सितंबर तक भी वे शुरू नहीं हो पाए हैं।

जिलाधिकारी के मुताबिक एक्सटर्नल सीवरेज सिस्टम, टाइल वर्क, साइट डिप्लॉयमेंट और डोर शटर फिटिंग जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य लंबित हैं। इन कार्यों के समय पर शुरू नहीं होने को लेकर डीएम ने नाराजगी जताई।

बैठक में परियोजना के पर्ट चार्ट में गलत और भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला भी सामने आया। इस पर भी जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

हर 15 दिन में होगी परियोजना की समीक्षा

डीएम आशीष चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब परियोजना की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी। उन्होंने कहा कि हर 15 दिन में ग्रीन बिल्डिंग परियोजना की समीक्षा होगी।

समीक्षा में काम की वास्तविक प्रगति, उपलब्ध संसाधन, लंबित कार्य और निर्धारित समयसीमा के बीच की स्थिति का आकलन किया जाएगा। यदि अगली समीक्षा तक निर्माण कार्य की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो संबंधित कार्यदायी संस्था के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ई-बस संचालन को लेकर भी डीएम सख्त

बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत संचालित ई-बस सेवा की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्धारित रूट पर ई-बसों का नियमित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि जो ई-बसें वर्तमान में ऑपरेशनल नहीं हैं, उनके संचालन में आ रही तकनीकी या अन्य समस्याओं का स्पष्ट कारण संबंधित अधिकारियों को प्रस्तुत करना होगा। डीएम ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए बसों की उपलब्धता और संचालन व्यवस्था पर भी नजर रखने के निर्देश दिए।

तय समय में पूरा करना होगा ग्रीन बिल्डिंग का काम

देहरादून में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग को महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य में लगातार हो रही देरी को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को परियोजना की सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी करने और निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने साफ किया कि परियोजना के लिए संसाधनों की कमी को निर्माण में देरी का आधार नहीं बनाया जा सकता। अब हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी और काम की प्रगति की लगातार निगरानी की जाएगी।

प्रशासन के सख्त रुख के बाद अब देखना होगा कि आने वाली समीक्षा में ग्रीन बिल्डिंग परियोजना की रफ्तार कितनी बढ़ती है और जांच में 21 करोड़ रुपये की धनराशि होल्ड किए जाने तथा निर्माण में देरी के लिए किसकी जिम्मेदारी तय होती है।

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