जोशीमठ/चमोली। उत्तराखंड का संवेदनशील जोशीमठ क्षेत्र एक बार फिर खतरे की जद में आ गया है। बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही बारिश ने यहां पुराने भू-धंसाव और भूस्खलन को फिर से सक्रिय कर दिया है। इससे स्थानीय लोगों में डर और चिंता का माहौल गहरा गया है।
सिंहद्वार में मकान हुआ असुरक्षित
सिंहद्वार इलाके में पुराने भू-धंसाव के सक्रिय होने से एक मकान में गंभीर दरारें उभर आई हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मकान को तत्काल खाली करवा दिया। यह वही क्षेत्र है, जहां वर्ष 2023 में चट्टान खिसकने की घटनाओं की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। उस समय आपदा प्रबंधन विभाग ने लोहे की पतली छड़ों से हालात को थामने की कोशिश की थी, लेकिन स्थायी समाधान न होने की वजह से अब खतरा और गहराता जा रहा है।
बद्रीनाथ मार्ग पर भूस्खलन
वहीं, बद्रीनाथ मार्ग पर नरसिंह मंदिर क्षेत्र में दो स्थानों पर भारी भूस्खलन हुआ है। इससे ऊपर की बस्ती और वहां बने मकानों के लिए नया खतरा खड़ा हो गया है। मार्ग पर मलबा आने से आवागमन भी प्रभावित हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों और यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीयों का आक्रोश
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि पिछले दो वर्षों में प्रभावितों का पुनर्वास और स्थायीकरण के लिए ठोस कदम उठाए जाते, तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। जोशीमठ आपदा के बाद बड़े आंदोलन और व्यापक चर्चाओं के बावजूद सरकार की कार्रवाई और प्रतिक्रिया की रफ्तार पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
भविष्य को लेकर गहराता सवाल
अब जब जोशीमठ की स्थिति एक बार फिर बिगड़ रही है, तो यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि उत्तराखंड के वे अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्र, जो हाल के वर्षों में चर्चा में आए हैं, उनका भविष्य क्या होगा? स्थानीयों का कहना है कि यदि जोशीमठ जैसी चर्चित आपदा के बाद भी ठोस समाधान नहीं निकल पाया, तो बाकी कम चर्चित क्षेत्रों का हाल आसानी से अनुमानित किया जा सकता है।
प्रशासन की चुनौती
प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है – एक ओर प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दूसरी ओर स्थायी समाधान की दिशा में ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाना।