55 हजार की आबादी वाले स्नो-कवर्ड एरिया में घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक; 182 कर्मचारियों को किया गया प्रशिक्षित, अब तक 338 लोगों ने पूरी की स्व-गणना
देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना के दूसरे चरण के तहत राज्य के हिम आच्छादित क्षेत्रों में आज यानी 1 सितंबर से जनगणना का विशेष अभियान शुरू होने जा रहा है। इस दौरान प्रगणक हिमाच्छादित क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर आबादी की गणना करेंगे। जनगणना कार्य को लेकर निदेशालय की ओर से सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
इस विशेष अभियान के लिए अब तक कुल 182 प्रगणक एवं पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है। इनमें 139 प्रगणक और 43 पर्यवेक्षक शामिल हैं। वहीं, 17 अगस्त से 31 अगस्त तक चले स्व-गणना अभियान के दौरान हिमाच्छादित क्षेत्रों में रहने वाले करीब 55 हजार लोगों में से अब तक केवल 338 नागरिकों ने स्व-गणना की है।
चार जिलों के 131 गांव और तीन शहरी निकायों में होगी गणना
उत्तराखंड के हिम आच्छादित क्षेत्रों में होने वाली इस विशेष जनगणना के तहत राज्य के चार जिलों—चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ को शामिल किया गया है।
इन चार जिलों के कुल 131 हिमाच्छादित गांवों और तीन शहरी स्थानीय निकायों में जनगणना का कार्य संचालित किया जाएगा। इसमें बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री के शहरी स्थानीय निकाय भी शामिल हैं।
जनगणना कार्य के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को जनगणना की अवधारणा और प्रक्रियाओं के साथ-साथ डिजिटल माध्यम से आंकड़े एकत्र करने, निर्धारित प्रगणना क्षेत्रों की पहचान करने तथा सूचना की शुद्धता और पूर्णता सुनिश्चित करने से संबंधित जानकारी दी गई है।
चमोली से पिथौरागढ़ तक इतने गांव शामिल
हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना के लिए जिलेवार गांवों और शहरी निकायों का विवरण भी निर्धारित किया गया है।
चमोली जिले के 23 गांव और बदरीनाथ नगर पंचायत इस अभियान में शामिल हैं।
रुद्रप्रयाग जिले के चार गांव और केदारनाथ नगर पंचायत को जनगणना के दायरे में रखा गया है।
उत्तरकाशी जिले के 69 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत में जनगणना होगी।
वहीं पिथौरागढ़ जिले के 35 गांव इस विशेष जनगणना अभियान में शामिल हैं।
इस तरह कुल 131 गांवों और तीन शहरी स्थानीय निकायों में प्रगणक घर-घर जाकर जनसंख्या संबंधी आंकड़े जुटाएंगे।
139 प्रगणक और 43 सुपरवाइजर तैनात
जनगणना कार्य को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराने के लिए कुल 139 प्रगणक और 43 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। सभी संबंधित कर्मचारियों को पहले ही प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें डिजिटल माध्यम से आंकड़े दर्ज करने और जनगणना क्षेत्र के प्रत्येक घर तथा व्यक्ति की जानकारी सही तरीके से दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई गई है।
हिमाच्छादित क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां सामान्य क्षेत्रों की तुलना में काफी चुनौतीपूर्ण हैं। ऐसे में जनगणना कार्य को निर्धारित समय में पूरा करना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
338 लोगों ने की स्व-गणना
जनगणना प्रक्रिया में जनता की भागीदारी भी देखने को मिली है। 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक चले स्व-गणना अभियान के दौरान कुल 338 नागरिकों ने सेल्फ-एन्यूमरेशन यानी स्व-गणना की है।
जिलेवार आंकड़ों के अनुसार:
उत्तरकाशी: 277 लोगों ने स्व-गणना की
चमोली: 29 लोगों ने स्व-गणना की
पिथौरागढ़: 24 लोगों ने स्व-गणना की
रुद्रप्रयाग: 8 लोगों ने स्व-गणना की
इस तरह हिमाच्छादित क्षेत्रों में स्व-गणना करने वाले कुल नागरिकों की संख्या 338 रही।
स्व-गणना करने वालों को दोबारा पूरी जानकारी नहीं देनी होगी
जिन नागरिकों ने स्व-गणना प्रक्रिया पूरी कर ली है, उन्हें घर-घर जनगणना के दौरान अपनी पूरी जानकारी दोबारा दर्ज कराने की जरूरत नहीं होगी।
स्व-गणना पूरी करने वाले व्यक्ति को प्रगणक के घर पहुंचने पर केवल अपना स्व-गणना नंबर उपलब्ध कराना होगा। प्रगणक जब इस नंबर को अपने मोबाइल ऐप में दर्ज करेगा तो संबंधित व्यक्ति की सभी जानकारी उसके मोबाइल में डाउनलोड हो जाएगी।
इससे स्व-गणना कर चुके नागरिकों की जानकारी को दोबारा दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी और जनगणना प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जनगणना चुनौतीपूर्ण
जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड की निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि हिमाच्छादित क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना कार्य का समय पर संचालन करना काफी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि जनगणना कार्य निदेशालय की ओर से राज्य सरकार और संबंधित जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इस विशेष अभियान को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि हिमाच्छादित क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की सही और पूर्ण गणना सुनिश्चित की जा सके।
जनगणना के नाम पर OTP मांगने वालों से रहें सावधान
निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने नागरिकों को जनगणना के नाम पर होने वाली संभावित धोखाधड़ी से भी सावधान किया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना कार्य के दौरान किसी भी व्यक्ति से OTP यानी One Time Password नहीं मांगा जाएगा।
नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी व्यक्ति के साथ अपना OTP अथवा अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश से सावधान रहने की भी सलाह दी गई है।
जनगणना से संबंधित किसी भी जानकारी अथवा सहायता के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं।
अधिकृत प्रगणकों को सहयोग करने की अपील
निदेशक ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कार्य के दौरान अधिकृत प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और परिवार की सही एवं पूर्ण गणना के लिए जनता का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
हिमाच्छादित क्षेत्रों में 1 सितंबर से शुरू हो रही यह विशेष जनगणना प्रक्रिया 131 गांवों और तीन शहरी स्थानीय निकायों में संचालित होगी। विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन और जनगणना टीम के सामने हर परिवार तक पहुंचने और सही आंकड़े जुटाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।
“हिमाच्छादित क्षेत्रों की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनगणना कार्य का समय पर संचालन करना काफी महत्वपूर्ण है। जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड की ओर से राज्य सरकार एवं संबंधित जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए नागरिक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं। जनगणना कार्य के दौरान किसी भी व्यक्ति से ओटीपी नहीं मांगा जाएगा। नागरिक किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी या अन्य संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश से सावधान रहें। नागरिक अधिकृत प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को आवश्यक सहयोग प्रदान करें, जिससे हर व्यक्ति एवं परिवार की सही और पूर्ण गणना की जा सके।”
— इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, जनगणना कार्य निदेशालय