चमोली औली- ”हर काम देश के नाम’ के संकल्प के साथ उत्तराखंड के औली में आयोजित ‘युद्ध अभ्यास 2026’ के दौरान भारत और अमेरिका की सेनाओं ने साझा युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। गुरुवार, 17 सितम्बर 2026 को दोनों देशों के थल सैनिकों ने आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए साथ मिलकर गहन और व्यावहारिक ट्रेनिंग की।
इस दौरान जवानों ने क्लोज-क्वार्टर कॉम्बैट (आमने-सामने की लड़ाई) वाले जटिल हालात से निपटने के लिए विशेष रूप से तैयार की गई ‘बिल्डिंग-क्लियरेंस’ और ‘रूम-इंटरवेन्शन’ ड्रिल्स को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
तकनीक और जांबाजी का अभूतपूर्व समन्वय
इस उच्च-स्तरीय अभ्यास में केवल सैनिकों की शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य तकनीक की ताकत भी देखने को मिली। हमलावर टीमों ने सामरिक अभियानों को सटीक रूप से पूरा करने के लिए:
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ड्रोन और रोबोटिक डॉग्स के माध्यम से अग्रिम रेकी और इनडोर नेविगेशन किया।
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डॉग स्क्वाड की मदद से संवेदनशील क्षेत्रों में विस्फोटक एवं संदिग्ध तत्वों की पहचान की।
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स्नाइपर्स को सटीक निशाना साधने और दूर से सुरक्षा कवर प्रदान करने के लिए तैनात किया।
इस युद्धाभ्यास ने यह साफ तौर पर प्रदर्शित किया कि आधुनिक आतंकवाद-विरोधी अभियानों में प्रशिक्षित जांबाज जवानों और अत्याधुनिक तकनीक का तालमेल किस प्रकार निर्णायक साबित हो सकता है।
सामरिक समझ और आपसी तालमेल में वृद्धि
अभ्यास के दौरान अमेरिकी सेना के जवानों ने भारतीय सैनिकों के साथ सीधा संवाद किया, उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधुनिक सैन्य उपकरणों का बारीकी से अवलोकन किया और प्रदर्शित क्षमताओं एवं तकनीकों को गहराई से समझा।
यह संयुक्त ट्रेनिंग दोनों देशों की सेनाओं के बीच पेशेवर जानकारी के आदान-प्रदान, रणनीतिक समझ को गहरा करने और भविष्य में किसी भी अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती के दौरान एक-दूसरे के साथ मिलकर (Interoperability) काम करने की क्षमता को और मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगी।