प्रदेश में सबसे ज्यादा 67 मामले देहरादून में, नैनीताल में 4 और हरिद्वार में 2 मरीज; अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन और एंटीवायरल दवाओं की व्यवस्था के निर्देश
देहरादून: उत्तराखंड में मौसमी बीमारियों के बीच अब स्वाइन फ्लू (इन्फ्लुएंजा H1N1) के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। प्रदेश में अब तक 73 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा मामले देहरादून जिले में सामने आए हैं। लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखा है और संदिग्ध मरीजों की जांच के लिए रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात की गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों में इन्फ्लुएंजा मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखने, ऑक्सीजन सपोर्ट उपलब्ध कराने और एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का पर्याप्त स्टॉक रखने को कहा गया है।
देहरादून में सबसे ज्यादा मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 73 मामले सामने आए हैं। इनमें अकेले देहरादून जिले में 67 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इसके अलावा नैनीताल में चार और हरिद्वार जिले में दो मामले सामने आए हैं।
कुल संक्रमित मरीजों में से 43 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 25 मरीजों का उपचार चल रहा है। वहीं देहरादून जिले में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए गए पांच मरीजों की मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिन पांच मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे। स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनकी स्थिति गंभीर हुई और उनकी मौत हो गई।
जिलों में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात
मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिलास्तर पर फील्ड टीमों को सक्रिय कर दिया है। रैपिड रिस्पांस टीमें संदिग्ध मरीजों की जांच के साथ-साथ क्षेत्रों में सर्वे भी कर रही हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और समुदाय स्तर पर स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि संदिग्ध मरीजों की जल्द पहचान कर उनका उपचार शुरू किया जा सके। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की व्यवस्था
स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पतालों को इन्फ्लुएंजा मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी रखने के निर्देश दिए हैं।
अस्पतालों की इमरजेंसी विंग में इन्फ्लुएंजा मरीजों के लिए बेड आरक्षित रखने को कहा गया है। इसके साथ ही ऑक्सीजन सपोर्ट और एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
जरूरत पड़ने पर स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों को अलग वार्ड में रखने की व्यवस्था भी की जा रही है, जिससे संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित किया जा सके।
स्वास्थ्य विभाग ने कहा- पैनिक होने की जरूरत नहीं
स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रदेश में सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने लोगों से घबराने के बजाय जागरूक रहने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पैनिक होने की जरूरत नहीं है। बरसात के मौसम और सर्दियों की शुरुआत में सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामले बढ़ते दिखाई देते हैं।
डॉ. शिखा जगपांगी के अनुसार स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में सामान्य तौर पर फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं और सामान्य मरीज लगभग एक सप्ताह में स्वस्थ हो जाता है। हालांकि, लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की आवश्यकता है।
बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सावधानी की जरूरत
दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के जनरल फिजिशियन डॉ. केसी पंत ने बताया कि स्वाइन फ्लू एक तरह से सर्दी-जुकाम और बुखार जैसी बीमारी के लक्षणों के साथ सामने आता है। फिलहाल कोई ऐसा जटिल मामला सामने नहीं आया है, लेकिन देशभर में सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामले बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सर्दी-जुकाम और बुखार को लेकर साल में एक बार लगने वाली फ्लू वैक्सीन भी लगवाई जा सकती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
ऐसे बुजुर्ग जिन्हें पहले से कोई बीमारी है, उन्हें संक्रमण से बचाव के लिए विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
को-मॉर्बिडिटी वाले मरीज रहें ज्यादा सतर्क
डॉ. केसी पंत के अनुसार जिन लोगों को पहले से शुगर, हाई ब्लड प्रेशर, लिवर या किडनी से जुड़ी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
ऐसे लोगों को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचने, जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करने, दूसरों से उचित दूरी बनाए रखने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी सीएमओ को अलर्ट रहने के निर्देश दिए
प्रदेश में बढ़ते स्वाइन फ्लू और अन्य मौसमी बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) से बात की है।
स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को केवल स्वाइन फ्लू ही नहीं, बल्कि मानसून से जुड़ी अन्य बीमारियों को लेकर भी अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पर्याप्त मात्रा में दवाइयां उपलब्ध रखने और प्लेटलेट्स की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है।
उन्होंने बताया कि सभी सीएमओ संवेदनशीलता के साथ काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग उन स्थानों पर भी नजर रख रहा है जहां बीमारी के मामले अधिक सामने आए हैं या कहीं पानी जमा हो रहा है।
डेंगू को लेकर भी निगरानी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू के साथ-साथ डेंगू को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है। जिन स्थानों पर पानी जमा होने की संभावना है, वहां विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मच्छरों के पनपने और डेंगू के मामलों को बढ़ने से रोका जा सके।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन मिलकर मौसमी बीमारियों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। अधिकारियों को स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए लोगों को सामान्य सावधानियां अपनानी चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
सर्दी-जुकाम और बुखार जैसे लक्षण होने पर लापरवाही न बरतें।
जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करें।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अनावश्यक जाने से बचें।
हाथों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
संक्रमित या बीमार व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
पहले से गंभीर बीमारी से ग्रसित लोग विशेष सावधानी बरतें।
लक्षण गंभीर होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश में स्थिति को नियंत्रण में बताया है, लेकिन 73 मामलों की पुष्टि और देहरादून में पांच मौतों के बाद निगरानी और सावधानी दोनों बढ़ा दी गई हैं। विभाग की टीमें लगातार संदिग्ध मामलों की जांच और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही हैं।