उत्तराखंड में चुनाव आयोग की बड़ी कार्रवाई, चार नेताओं पर तीन साल का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध

2022 विधानसभा चुनाव में खर्च का ब्यौरा नहीं देने पर निर्वाचन आयोग ने लिया सख्त फैसला, चकराता, ऋषिकेश, राजपुर रोड और धर्मपुर सीट से चुनाव लड़ चुके प्रत्याशियों पर कार्रवाई

देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। भारत निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के चार ऐसे नेताओं पर तीन साल के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था, लेकिन चुनावी खर्च का पूरा ब्यौरा निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध नहीं कराया। आयोग की कार्रवाई के बाद अब ये चारों नेता अगले तीन साल की अवधि में संसद के किसी भी सदन, राज्य विधानसभा, संघ राज्य क्षेत्र की विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य चुने जाने या होने के लिए अयोग्य रहेंगे।

यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के तहत की गई है। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से मामले में संबंधित प्रत्याशियों को पहले नोटिस जारी कर चुनावी खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराने को कहा गया था। हालांकि, प्रत्याशियों की ओर से दिए गए जवाब से आयोग संतुष्ट नहीं हुआ। इसके बाद मामले की जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को भेजी गई, जहां परीक्षण के बाद चारों के खिलाफ तीन साल के प्रतिबंध का आदेश जारी किया गया।

चार नेताओं पर हुई कार्रवाई

भारत निर्वाचन आयोग के आदेश के अनुसार, उत्तराखंड विधानसभा के वर्ष 2022 के चुनाव में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ने वाले चार प्रत्याशियों को तीन साल की अवधि के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

रामानन्द सिंह:
उत्तराखंड राज्य के साधारण निर्वाचन 2022 में 15-चकराता विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी रामानन्द सिंह, ग्राम ऐठान, पोस्ट डागुठा, तहसील त्यूनी, देहरादून को आदेश की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए संसद के किसी भी सदन, राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की विधानसभा अथवा विधान परिषद का सदस्य चुने जाने या होने से प्रतिबंधित किया गया है।

जगजीत सिंह:
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 24-ऋषिकेश विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी जगजीत सिंह, 26/21 चन्द्रेश्वर मार्ग, मायाकुंड, ऋषिकेश, जिला देहरादून को भी आदेश की तारीख से तीन साल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

कमलेश माथुर:
20-राजपुर रोड विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से वर्ष 2022 में निर्वाचन लड़ने वाले अभ्यर्थी कमलेश माथुर, 59 लाडपुर, रायपुर रोड, देहरादून पर भी तीन साल की अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया है।

बलबीर कुमार तलवार:
इसके अलावा 18-धर्मपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से वर्ष 2022 का चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थी बलबीर कुमार तलवार, 96/48 फेज-2, प्रीत विहार, माजरा, इन्द्रिरा गांधी मार्ग, निरंजनपुर, देहरादून को भी आदेश की तारीख से तीन साल की अवधि के लिए संसद के किसी भी सदन, राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की विधानसभा अथवा विधान परिषद का सदस्य चुने जाने या होने के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

चुनावी खर्च का ब्यौरा नहीं देने पर कार्रवाई

दरअसल, वर्ष 2022 में उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव हुए थे। चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च से संबंधित ब्यौरा निर्वाचन नियमों के तहत उपलब्ध कराना जरूरी होता है। इन चारों प्रत्याशियों की ओर से चुनाव में किए गए खर्च का ब्यौरा संबंधित जानकारी के साथ उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया गया।

इसके बाद निर्वाचन कार्यालय की ओर से चारों प्रत्याशियों को नोटिस जारी किए गए और चुनावी खर्च के ब्यौरे से संबंधित जानकारी मांगी गई। प्रत्याशियों ने नोटिस का जवाब तो दिया, लेकिन उनके जवाब से निर्वाचन आयोग संतुष्ट नहीं हुआ।

मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने पूरी जानकारी भारत निर्वाचन आयोग को भेजी। भारत निर्वाचन आयोग ने मामले की जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 10क के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की।

तीन साल तक चुनाव लड़ने पर रोक

भारत निर्वाचन आयोग के आदेश के बाद इन चारों नेताओं पर आदेश की तारीख से अगले तीन वर्षों तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लागू रहेगा। इस अवधि में वे संसद के किसी भी सदन, राज्य विधानसभा, संघ राज्य क्षेत्र की विधानसभा अथवा विधान परिषद के सदस्य के रूप में चुने जाने या होने के लिए अयोग्य रहेंगे।

उत्तराखंड में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में निर्वाचन आयोग की यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच आयोग चुनावी प्रक्रिया से जुड़े नियमों और प्रत्याशियों की जिम्मेदारियों को लेकर सख्ती बरत रहा है। चुनावी खर्च का निर्धारित ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराने के मामले में हुई यह कार्रवाई इसी दिशा में एक अहम कदम है।

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