उत्तराखंड में भाजपा का बड़ा सियासी दांव, अनुकृति गुसाईं को प्रदेश प्रवक्ता बनाकर हरक सिंह रावत के सामने खड़ी की नई चुनौती

कभी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं अनुकृति अब भाजपा की मुखर आवाज, श्वसुर हरक सिंह रावत कांग्रेस से साधेंगे निशाना तो बहू भाजपा के मंच से देंगी जवाब

देहरादून: उत्तराखंड की सियासत में परिवार और राजनीति का रिश्ता एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने संगठन में नई नियुक्तियों के जरिए अपना राजनीतिक संदेश मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं को भाजपा ने प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी है।

भाजपा ने आठ नए प्रदेश प्रवक्ताओं की घोषणा की है। इनमें अनुकृति गुसाईं को कोटद्वार क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई है। पहली नजर में यह पार्टी के मीडिया और संगठनात्मक तंत्र को मजबूत करने वाली नियुक्ति दिखाई देती है, लेकिन उत्तराखंड की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं।

खास बात यह है कि अनुकृति वर्ष 2022 में कांग्रेस के टिकट पर लैंसडाउन विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं। इसके बाद अप्रैल 2024 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। अब पार्टी ने उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर सार्वजनिक राजनीतिक भूमिका में आगे बढ़ने का अवसर दिया है।

भाजपा की आवाज बनेंगी अनुकृति

प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी मिलने के बाद अनुकृति गुसाईं की भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें प्रदेश के राजनीतिक मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखने, सरकार के फैसलों का बचाव करने और विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए लगातार मंच मिलेगा।

आने वाले समय में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। ऐसे में भाजपा के लिए महिला और युवा चेहरे को मीडिया के सामने सक्रिय करना भी संगठन की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

अनुकृति के पास राजनीति में पहले से चुनाव लड़ने का अनुभव है। वर्ष 2022 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर लैंसडाउन से चुनाव लड़ा था। भाजपा में शामिल होने के बाद अब उन्हें संगठन ने प्रदेश स्तर पर जिम्मेदारी देकर उनकी राजनीतिक सक्रियता को नया विस्तार दिया है।

एक ही परिवार, लेकिन अलग-अलग राजनीतिक रास्ते

अनुकृति गुसाईं की नई जिम्मेदारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उनके श्वसुर हरक सिंह रावत वर्तमान में कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में आने वाले समय में एक दिलचस्प राजनीतिक तस्वीर देखने को मिल सकती है।

एक ओर हरक सिंह रावत कांग्रेस के मंच से भाजपा और प्रदेश सरकार पर निशाना साधेंगे, तो दूसरी ओर उनकी पुत्रवधू अनुकृति गुसाईं भाजपा की ओर से उन राजनीतिक हमलों का जवाब देती नजर आ सकती हैं।

यानी पारिवारिक रिश्ता वही रहेगा, लेकिन दोनों के राजनीतिक रास्ते अलग-अलग होंगे। उत्तराखंड की राजनीति में परिवार के भीतर दो अलग राजनीतिक ध्रुवों का यह समीकरण अपने आप में खास है।

2027 से पहले भाजपा की रणनीति पर नजर

उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी हैं। ऐसे समय में भाजपा की ओर से अनुकृति को प्रदेश प्रवक्ता बनाए जाने को केवल संगठनात्मक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

भाजपा के पास प्रदेश में मजबूत संगठनात्मक ढांचा है। अब पार्टी अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों से जुड़े चेहरों को सामने लाकर अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। कोटद्वार और गढ़वाल क्षेत्र की राजनीति में अनुकृति की सक्रियता आने वाले समय में महत्वपूर्ण हो सकती है।

उनकी नियुक्ति से पार्टी को एक ऐसा चेहरा मिला है, जो पहले चुनावी राजनीति का अनुभव रखता है और अब भाजपा के संगठनात्मक मंच पर अपनी भूमिका निभाएगा।

बहू और श्वसुर, दोनों की होगी सियासी परीक्षा

अनुकृति गुसाईं के लिए प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी राजनीतिक रूप से एक बड़ा अवसर है। यदि वह प्रदेश के मुद्दों पर लगातार मुखर रहती हैं, गढ़वाल की राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाती हैं और संगठन के भीतर अपनी उपयोगिता साबित करती हैं, तो उनकी पहचान धीरे-धीरे केवल हरक सिंह रावत की पुत्रवधू तक सीमित नहीं रहेगी।

वहीं, हरक सिंह रावत के सामने भी आने वाले समय में एक अलग तरह की राजनीतिक चुनौती होगी। उनकी राजनीतिक पहचान वर्षों के अनुभव, क्षेत्रीय संपर्क और गढ़वाल की राजनीति में मजबूत पकड़ से बनी है। दूसरी ओर अनुकृति के पास नई पीढ़ी के चेहरे की पहचान, महिला होने का राजनीतिक लाभ और अब भाजपा के मजबूत संगठन का मंच है।

ऐसे में दोनों के सामने अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान और प्रभाव को साबित करने की चुनौती होगी।

हरक के लिए परिवार और राजनीति का नया समीकरण

हरक सिंह रावत लंबे समय से उत्तराखंड की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं। ऐसे में उनकी पुत्रवधू का भाजपा में सक्रिय भूमिका निभाना राज्य की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हरक जहां कांग्रेस के साथ रहते हुए भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाएंगे, वहीं अनुकृति अब भाजपा के पक्ष में खड़ी होकर कांग्रेस के सवालों का जवाब देंगी। आने वाले महीनों में यदि दोनों नेता एक ही राजनीतिक मुद्दे पर आमने-सामने के बयान देते हैं, तो यह उत्तराखंड की राजनीति के दिलचस्प सियासी दृश्यों में शामिल हो सकता है।

अनुकृति के सामने अपनी पहचान बनाने की चुनौती

भाजपा ने भले ही अनुकृति को प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी देकर बड़ा मंच दिया है, लेकिन अब असली परीक्षा उनकी राजनीतिक सक्रियता की होगी। उन्हें पार्टी की नीतियों और सरकार के फैसलों का प्रभावी तरीके से बचाव करना होगा और विपक्ष के आरोपों का जवाब भी देना होगा।

इसके साथ ही गढ़वाल क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करना भी उनके लिए अहम होगा। यदि वह संगठन में लगातार सक्रिय रहती हैं और जनता के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने में सफल होती हैं, तो आने वाले समय में उत्तराखंड भाजपा में उनकी भूमिका और बड़ी हो सकती है।

फिलहाल, भाजपा की इस नियुक्ति ने उत्तराखंड की सियासत में एक नया राजनीतिक समीकरण जरूर खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव तक श्वसुर हरक सिंह रावत और बहू अनुकृति गुसाईं की अलग-अलग राजनीतिक राहें किस तरह एक-दूसरे के सामने आती हैं और इसका चुनावी असर कितना दिखाई देता है।

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