ऊर्जा क्षेत्र को नई उड़ान देने की दिशा में उत्तराखंड का बड़ा कदम, मुख्यमंत्री धामी ने केंद्रीय विद्युत मंत्री से की अहम मुलाकात

केंद्रीय पूल से जुलाई में 150 मेगावाट और अगस्त के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली की मांग

10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता का अनुरोध

BESS क्षमता 500 से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर करने की मांग

पिटकुल की 3,638 करोड़ रुपये की एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना में 80:20 वित्तीय व्यवस्था बनाए रखने का आग्रह

नई दिल्ली।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर से मुलाकात कर राज्य की ऊर्जा आवश्यकताओं, जल विद्युत परियोजनाओं, पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं, बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तथा पिटकुल की एडीबी (ADB) सहायतित पारेषण परियोजना सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर केंद्रीय पूल से अतिरिक्त विद्युत उपलब्ध कराने में दिए जा रहे सहयोग के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार एल-नीनो की संभावित परिस्थितियों, कम वर्षा और जलाशयों में जल की कमी के कारण आगामी महीनों में जल विद्युत उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। इसके साथ ही चारधाम यात्रा और आगामी कांवड़ यात्रा के दौरान राज्य में बिजली की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जुलाई 2026 की शेष अवधि के लिए 150 मेगावाट तथा अगस्त 2026 के लिए 200 मेगावाट अतिरिक्त बिजली केंद्रीय पूल से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

बैठक में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विशाल जल विद्युत क्षमता का उल्लेख करते हुए राज्य को पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में जल विद्युत परियोजनाओं को गति मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने राज्य में लगभग 10 गीगावाट पम्प्ड स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना के लिए अगले पांच वर्षों में 7,800 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता अथवा वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) उपलब्ध कराने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने राज्य की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं और ग्रिड की स्थिरता को ध्यान में रखते हुए बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की स्वीकृत क्षमता 500 मेगावाट आवर से बढ़ाकर 665 मेगावाट आवर करने तथा उसके अनुरूप वायबिलिटी गैप फंडिंग उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया।

बैठक में पिटकुल की 3,638.26 करोड़ रुपये लागत वाली एडीबी सहायतित पारेषण परियोजना भी प्रमुख मुद्दा रही। मुख्यमंत्री ने परियोजना के लिए प्रस्तावित मूल 80:20 एडीबी ऋण एवं राज्यांश की वित्तीय व्यवस्था को यथावत बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि यह व्यवस्था उत्तराखंड जैसे विशेष श्रेणी के हिमालयी राज्य के हितों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि परियोजना को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) तकनीकी रूप से उपयुक्त मान चुका है और विद्युत मंत्रालय ने भी एडीबी सहायता पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि परियोजना की वित्तीय व्यवस्था में बदलाव कर एडीबी की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक सीमित की जाती है तो राज्य को विशेष श्रेणी राज्य के रूप में मिलने वाले वित्तीय लाभ प्रभावित होंगे। इसलिए मूल 80:20 वित्तीय पैटर्न को बरकरार रखते हुए परियोजना को शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के संकल्प को साकार करने में उत्तराखंड की जल विद्युत क्षमता महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग राज्य के ऊर्जा क्षेत्र, आधारभूत संरचना और सतत विकास को नई गति प्रदान करेगा।

बैठक के दौरान केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत सभी प्रस्तावों पर सकारात्मक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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