नैनीताल: उत्तराखंड के देहरादून जिले के सौड़ क्षेत्र में पुल निर्माण के दौरान गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद सस्पेंड किए गए अभियंता को फिलहाल हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए विपक्षियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, पुल निर्माण के दौरान रेत की जगह मिट्टी मिलाए जाने का आरोप सामने आया था। इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब स्थानीय ग्रामीणों ने निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई। ग्रामीणों ने मौके का वीडियो भी बनाया और इसकी शिकायत पुल निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था ब्रिडकुल (BRIDCUL) से की।
शिकायत के बाद कंपनी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डेपुटेशन पर तैनात अभियंता अजय कुमार को सस्पेंड कर दिया। 27 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान विपक्षियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पुल निर्माण में इस तरह की लापरवाही न सिर्फ तकनीकी मानकों का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है। यदि पुल इसी स्थिति में तैयार हो जाता, तो भविष्य में गंभीर हादसा हो सकता था।
सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है और निर्माण गुणवत्ता से समझौता किया गया। यह मामला सीधे तौर पर जनहित और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं, अभियंता अजय कुमार ने अपनी बर्खास्तगी के आदेश को नैनीताल हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उनकी ओर से दलील दी गई कि उनका निलंबन केंद्रीय प्रशासनिक नियमावली के खिलाफ है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें बर्खास्त करने का अधिकार कंपनी के पास नहीं है, क्योंकि उनकी मूल नियुक्ति लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा की गई है और वे केवल डेपुटेशन पर कार्य कर रहे थे।
अभियंता ने कोर्ट से बहाली की मांग करते हुए कहा कि केवल विभाग को ही उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है। हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कोई राहत देने से इनकार कर दिया।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आम जनता के हितों की रक्षा करना न्यायालय की प्राथमिकता है। कोर्ट ने विपक्षियों को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं और अगली सुनवाई भी तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।