उत्तराखंड में बरसात का प्रकोप: 373 सड़कें बंद, ऊंची चोटियों पर बर्फबारी

सितंबर की शुरुआत ने उत्तराखंड में बारिश का कहर और तेज कर दिया है। इस बार मानसून ने प्रदेशभर में जमकर सितम ढाया है। हालांकि फिलहाल बरसात के तेवर कुछ हल्के पड़े हैं, लेकिन मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि खतरा अभी टला नहीं है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों में कहीं-कहीं भारी बारिश की आशंका जताते हुए येलो अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा अन्य जिलों में भी तेज बारिश के दौर बने रहने की संभावना है।

बारिश से जनजीवन अस्तव्यस्त

लगातार हो रही बारिश ने उत्तराखंड में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गांव से लेकर शहर तक की सड़कों पर यातायात बाधित हो गया है। जगह-जगह भूस्खलन और सड़क धंसने से हालात बिगड़े हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद स्वीकार किया है कि इस मानसून सीजन में सड़कों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि मानसून के बाद विशेष अभियान चलाकर सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को गड्ढामुक्त बनाया जाएगा।

सड़कें और हाईवे सबसे ज्यादा प्रभावित

आपदा विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक राज्य में लोक निर्माण विभाग (PWD) की ढाई हजार से अधिक सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जबकि 6 नेशनल हाईवे भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अकेले सड़क ढांचे को ही 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। वर्तमान में उत्तराखंड में 373 सड़कें बंद पड़ी हैं, जिनमें 9 नेशनल हाईवे, PWD की 86 सड़कें और 249 ग्रामीण मार्ग शामिल हैं।

जिलावार स्थिति भी बेहद चिंताजनक है—

  • पौड़ी में 67

  • टिहरी में 34

  • चमोली में 59

  • हरिद्वार में 9

  • रुद्रप्रयाग में 51

  • उत्तरकाशी में 63

  • पिथौरागढ़ में 48

  • बागेश्वर में 15

  • नैनीताल में 28

  • उधम सिंह नगर में 2 सड़कें बंद हैं।

ऊंची चोटियों पर बर्फबारी

भारी बारिश के साथ-साथ इस बार मानसून ने पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी भी जल्दी करवा दी है। गंगोत्री, बद्रीनाथ और हिमालय की अन्य चोटियों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। आमतौर पर अक्टूबर के मध्य से पहले बर्फबारी नहीं होती, लेकिन इस बार सितंबर की शुरुआत में ही बर्फबारी हो रही है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण पश्चिम मानसून के बीच पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता ने हिमालयी क्षेत्रों में तापमान को तेजी से नीचे गिरा दिया है। यही वजह है कि 5000 मीटर की ऊंचाई पर इस समय बर्फबारी हो रही है। वैज्ञानिक रोहित थपलियाल का कहना है कि 6000 मीटर से अधिक ऊंचाई पर तो पूरे वर्ष हिमपात की स्थिति बनी रहती है, लेकिन सितंबर में बर्फबारी का यह दौर सामान्य से अलग और पश्चिमी विक्षोभ के अति सक्रिय होने का परिणाम है।

सामान्य से ज्यादा बरसे बादल

इस बार मानसून में बारिश सामान्य से ज्यादा हुई है। अगस्त महीने में प्रदेश पर बादल सामान्य से करीब डेढ़ गुना अधिक बरसे। अब सितंबर में भी बारिश का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

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