एसआईआर को लेकर हरिद्वार में सियासी घमासान, कांग्रेस विधायक कलेक्ट्रेट पहुंचे; फर्जी आपत्तियों के लगाए आरोप
हरिद्वार: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर हरिद्वार में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के आरोपों को लेकर कांग्रेस के कई विधायक लामबंद होकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे। विधायकों ने प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें और आपत्तियां रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने की मांग की।
कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के माध्यम से फर्जी आपत्तियां दर्ज कराकर पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने का कथित प्रयास किया जा रहा है। उनका आरोप है कि राजनीतिक लाभ के लिए मतदाताओं के नाम काटने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस विधायकों ने इस मामले में भाजपा विधायकों पर भी वोट कटवाने की कथित साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये सभी आरोप कांग्रेस विधायकों की ओर से लगाए गए हैं। प्रशासन की ओर से प्राप्त शिकायतों की जांच कराने और जांच में कमी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है।
कई कांग्रेस विधायक एकजुट होकर पहुंचे कलेक्ट्रेट
एसआईआर प्रक्रिया को लेकर शिकायत दर्ज कराने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचने वालों में कांग्रेस विधायक ममता राकेश, काजी निजामुद्दीन, फुरकान अहमद, रवि बहादुर और वीरेंद्र जाती शामिल रहे। उनके साथ बसपा विधायक मोहम्मद शहजाद भी जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे।
विधायकों ने एडीएम जितेंद्र कुमार के साथ बैठक की और एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आ रही शिकायतों एवं आपत्तियों को प्रशासन के सामने रखा। बैठक में फॉर्म-7 के माध्यम से दर्ज की जा रही आपत्तियों की जांच, मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रखने को लेकर चर्चा हुई।
विधायकों ने प्रशासन से मांग की कि फॉर्म-7 के माध्यम से दर्ज होने वाली प्रत्येक आपत्ति की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए और केवल वास्तविक एवं नियमों के अनुरूप पाए जाने वाले मामलों में ही आगे की कार्रवाई की जाए।
काजी निजामुद्दीन बोले- एक ही परिवार के अलग-अलग लोगों के नाम से शिकायत
मंगलौर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जहां एक ही परिवार के अलग-अलग लोगों के नाम से एसआईआर प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज कराई गई है।
काजी निजामुद्दीन के अनुसार, बीएलओ और पूर्व विधायक के परिवार के सदस्यों के नाम पर भी शिकायत किए जाने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ फर्जी शिकायतकर्ता इस तरह की शिकायतें दर्ज कर रहे हैं और ऐसी शिकायतें केवल एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई विधानसभा क्षेत्रों से इस प्रकार के मामले सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत की ओर से भी इसी तरह की शिकायतें सामने रखी गई हैं।
प्रशासन बोला- शिकायतों की होगी जांच
एसआईआर से संबंधित शिकायतों को लेकर प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखा है। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि विधायकों की ओर से एसआईआर से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई है और फॉर्म-7 से जुड़ी कई शिकायतें प्रशासन को प्राप्त हुई हैं।
उन्होंने कहा कि प्राप्त शिकायतों की जांच की जाएगी। यदि जांच के दौरान किसी प्रकार की कमी सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इससे साफ है कि प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए उनके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं।
फर्जी शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ लोग जानबूझकर फर्जी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। बताया गया कि यदि चुनाव आयोग की जांच में ऐसे लोगों के नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
शिकायतकर्ताओं की ओर से यह भी दावा किया गया कि नियमों के तहत कोई व्यक्ति बल्क में शिकायत नहीं कर सकता। एक व्यक्ति की ओर से करीब 30 शिकायतें दर्ज किए जाने का भी दावा किया गया है। यदि जांच में उसके द्वारा लगाए गए आरोप झूठे पाए जाते हैं तो मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
फिलहाल इस संबंध में चुनाव आयोग के संबंधित अधिकारियों को शिकायत दिए जाने की बात कही गई है।
पहले भी प्रेस वार्ता कर चुकी हैं अनुपमा रावत
गौरतलब है कि बीते मंगलवार को हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने भी प्रेस वार्ता कर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सत्तारूढ़ दल के लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी विधानसभा क्षेत्र के लोगों के वोट कटवाने और फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग का प्रयास किया जा रहा है। अनुपमा रावत ने इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर सदन तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी भी दी थी।
अब कांग्रेस के कई विधायकों के एक साथ जिला कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर उठे सवाल
एसआईआर प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाना है। ऐसे में राजनीतिक दलों की ओर से उठाई जा रही आपत्तियों के बीच मतदाता सूची की पारदर्शिता और प्रत्येक आपत्ति के निष्पक्ष सत्यापन का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है।
कांग्रेस विधायकों की मांग है कि पात्र मतदाताओं के नाम किसी भी स्थिति में मतदाता सूची से नहीं हटने चाहिए। वहीं प्रशासन का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की जांच की जाएगी और यदि जांच में कोई कमी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन और चुनाव अधिकारियों की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाली शिकायतों और उनके निस्तारण पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ मतदाताओं की भी नजर बनी हुई है।