देहरादून: उत्तराखंड के सांसदों और विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों की सुनवाई लंबे समय तक लटकी रहने पर नैनीताल हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब देने को कहा है और चेताया कि यदि मामलों की सुनवाई में तेजी नहीं लाई गई तो जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो सकता है।
जनहित याचिका पर सुनवाई यह मामला एडवोकेट विकेश सिंह नेगी की जनहित याचिका से जुड़ा है। नेगी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की कि सांसदों और विधायकों पर दर्ज आपराधिक मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए। उन्होंने अपनी दलील में सुप्रीम कोर्ट के 6 नवंबर 2023 के आदेश का हवाला दिया, जिसमें अश्विनी उपाध्याय बनाम केंद्र सरकार केस में सभी राज्यों को ऐसे मामलों के लिए विशेष अदालतें बनाने का निर्देश दिया गया था।
लंबित मामले और सरकार की निष्क्रियता याचिकाकर्ता नेगी ने कोर्ट को बताया कि उत्तराखंड में कई सांसद और विधायक ऐसे हैं जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं, लेकिन अब तक न तो राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया है और न ही फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया है। इससे मामलों की सुनवाई स्थगित और जनता का भरोसा कमजोर हो रहा है।
राज्य सरकार से जवाब मांगा गया सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को सूचित किया गया कि इस मामले पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए थोड़ा समय चाहिए। कोर्ट ने सरकार की मांग मानते हुए एक सप्ताह का समय दिया और अगली सुनवाई की तारीख 26 सितंबर तय की है।
जनप्रतिनिधियों की जल्द सुनवाई जरूरी याचिकाकर्ता विकेश सिंह नेगी ने कोर्ट से प्रार्थना की कि राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएँ कि वह फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सांसदों और विधायकों के आपराधिक मामलों की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करे। उनका कहना है कि यदि यह व्यवस्था शीघ्र नहीं की गई तो लोकतंत्र पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
नैनीताल हाईकोर्ट की यह कार्रवाई उत्तराखंड में न्याय व्यवस्था में पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही को बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखी जा रही है। फास्ट ट्रैक अदालत के गठन से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और राज्य में न्याय की प्रक्रिया मजबूत होगी।