एम्स के डॉक्टरों ने मृत घोषित किया था, परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे; श्मशान ले जाते वक्त अचानक खुली आंखें
ऋषिकेश में हैरान करने वाला मामला, परिजन तुरंत लेकर पहुंचे एम्स; अब चल रहा उपचार, डॉक्टरों के रवैये पर भी उठे सवाल
देहरादून। तीर्थनगरी ऋषिकेश में एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने मौत और जिंदगी के बीच की उस बारीक रेखा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे आमतौर पर अंतिम मान लिया जाता है। एक व्यक्ति को एम्स ऋषिकेश के डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद परिवार में मातम छा गया और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुट गए। अंतिम यात्रा के लिए वाहन भी बुक कर लिया गया था और शव को श्मशान घाट ले जाने की तैयारी शुरू हो चुकी थी।
लेकिन अंतिम संस्कार से ठीक पहले पूरी कहानी अचानक बदल गई। बताया जा रहा है कि शव को लेकर जा रही एंबुलेंस जब श्यामपुर रेलवे फाटक के पास पहुंची तो सड़क के एक गहरे गड्ढे में उसका पहिया चला गया। वाहन को जोरदार झटका लगा। इसी दौरान मृत घोषित किए गए व्यक्ति की आंखें खुल गईं और उनकी सांसें चलने लगीं।
घटना के बाद परिजनों में जहां हैरानी के साथ नई उम्मीद जगी, वहीं आनन-फानन में उन्हें दोबारा उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश ले जाया गया। फिलहाल उनका इलाज चल रहा है।
पहले किडनी फेल्योर, फिर आया हार्ट अटैक
मामला ऋषिकेश के गीता नगर गली नंबर-5 से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां रहने वाले साईं राम की तबीयत खराब हुई थी। बताया गया कि उन्हें पहले किडनी फेल्योर की समस्या हुई और इसके बाद उन्हें हार्ट अटैक आया।
परिजन उन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिवार ने उन्हें मृत मानते हुए अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दीं।
परिवार के लिए यह बेहद दुखद समय था। अंतिम संस्कार की व्यवस्था के तहत मुक्तिधाम सेवा समिति से अंतिम यात्रा वाहन भी बुक कर लिया गया था। इसके बाद साईं राम के शव को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया जा रहा था।
लेकिन श्मशान पहुंचने से पहले ही रास्ते में हुई एक घटना ने सबको हैरान कर दिया।
गहरे गड्ढे में गया एंबुलेंस का पहिया, जोरदार झटका लगा
जब एंबुलेंस शव को लेकर श्यामपुर रेलवे फाटक के पास से गुजर रही थी, तभी सड़क पर मौजूद एक गहरे गड्ढे में एंबुलेंस का पहिया चला गया।
गड्ढे के कारण एंबुलेंस को जोरदार झटका लगा। इसी झटके के बाद साईं राम के शरीर में हलचल होने और उनकी सांसें चलने की बात सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अचानक आंखें खोल दीं।
इस घटना को देखकर अंतिम यात्रा में शामिल परिजन और अन्य लोग भी हैरान रह गए। जिस व्यक्ति को कुछ समय पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था, उसके जीवित होने के संकेत मिलने से परिवार में एक बार फिर उम्मीद जाग गई।
मुक्तिधाम सेवा समिति ने बताई पूरी घटना
मुक्तिधाम सेवा समिति के पंकज गुप्ता ने घटना के बारे में बताया कि एंबुलेंस सड़क के गड्ढे में जाने के बाद जोरदार झटका लगा और इसी दौरान साईं राम जी की सांसें वापस लौट आईं।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने समय गंवाए बिना उन्हें दोबारा उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंचाया।
जिस परिवार ने कुछ देर पहले अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी थी, वही परिवार अब साईं राम के इलाज और स्वस्थ होने की उम्मीद में अस्पताल पहुंच गया।
एम्स में चल रहा इलाज
घटना के बाद साईं राम को उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
घटना सामने आने के बाद इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। परिवार और आसपास के लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। वहीं इस घटनाक्रम ने चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी व्यक्ति को मृत घोषित किया गया था और बाद में उसमें सांसें चलने लगीं, तो मृत्यु की पुष्टि किस प्रक्रिया के तहत की गई थी?
हालांकि, इस मामले में अंतिम चिकित्सकीय निष्कर्ष संबंधित चिकित्सकों और अस्पताल की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि व्यक्ति को किस चिकित्सकीय स्थिति में मृत घोषित किया गया था या बाद में उनकी सांसें किस कारण वापस चलीं।
डॉक्टरों के रवैये पर भी उठे सवाल
घटना के बाद डॉक्टरों के रवैये को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या मरीज की स्थिति की पर्याप्त जांच के बाद उन्हें मृत घोषित किया गया था या कहीं कोई जल्दबाजी हुई?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि जिस व्यक्ति को मृत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही थी, उसमें बाद में जीवन के संकेत दिखाई दिए।
हालांकि इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सकीय जांच और संबंधित अस्पताल का पक्ष सामने आना जरूरी है।
सड़क के गड्ढों पर भी उठे गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा पहलू उत्तराखंड की सड़कों की स्थिति से जुड़ा है। मानसूनी सीजन के दौरान प्रदेश की कई सड़कों की हालत खराब बताई जा रही है। जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं।
इन गड्ढों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर सड़क की खराब स्थिति दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही है।
ऋषिकेश की इस घटना ने इसी समस्या को एक अलग और बेहद असामान्य तरीके से सामने ला दिया है।
आमतौर पर सड़क के गड्ढे दुर्घटनाओं और नुकसान के लिए चर्चा में आते हैं, लेकिन इस मामले में परिजनों और मुक्तिधाम सेवा समिति की ओर से दावा किया जा रहा है कि एंबुलेंस के गड्ढे में जाने से लगे झटके के बाद मृत घोषित व्यक्ति की सांसें चलने लगीं।
हादसों का कारण बन रहे गड्ढे
मानसून के दौरान लगातार बारिश के कारण कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। छोटे गड्ढे समय के साथ बड़े होते जाते हैं और कई बार वाहन चालकों के लिए खतरा बन जाते हैं।
विशेषकर रात के समय या बारिश के दौरान सड़क पर पानी भर जाने से गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहनों से लेकर एंबुलेंस और अन्य वाहनों तक के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है।
यही कारण है कि मानसून के दौरान सड़क मरम्मत और गड्ढों को भरने का काम बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस घटना ने छोड़ दिए कई सवाल
ऋषिकेश की इस घटना में एक तरफ साईं राम के दोबारा उपचार के लिए एम्स पहुंचने की बात सामने आई है, तो दूसरी तरफ कई सवाल भी खड़े हुए हैं।
- आखिर साईं राम को किस चिकित्सकीय स्थिति में मृत घोषित किया गया?
- मृत्यु की पुष्टि के लिए कौन-कौन सी प्रक्रियाएं अपनाई गईं?
- अंतिम यात्रा के दौरान उनके शरीर में जीवन के संकेत कैसे दिखाई दिए?
- क्या इस मामले की अस्पताल स्तर पर जांच होगी?
- सड़क के जिस गड्ढे से एंबुलेंस गुजरी, उसकी स्थिति कैसी थी?
- मानसून में सड़कों की मरम्मत और गड्ढों को भरने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कार्रवाई कर रहे हैं?
इन सवालों के जवाब सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
मौत की तैयारी से इलाज तक पहुंचा परिवार
इस घटना का सबसे भावनात्मक पहलू यह है कि जिस परिवार ने कुछ समय पहले अपने सदस्य की मौत मानकर अंतिम संस्कार की तैयारियां शुरू कर दी थीं, वही परिवार अचानक उन्हें इलाज के लिए अस्पताल लेकर पहुंचा।
अंतिम यात्रा के लिए बुक किए गए वाहन में जहां कुछ देर पहले एक शव को श्मशान ले जाने की तैयारी थी, वहीं रास्ते में हुई घटना के बाद उसी व्यक्ति को जीवन बचाने के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा।
फिलहाल साईं राम का उपचार एम्स ऋषिकेश में चल रहा है और परिवार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद कर रहा है।
चमत्कार, चिकित्सकीय स्थिति या जांच का विषय?
यह घटना निश्चित तौर पर असामान्य है और लोगों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे चमत्कार के तौर पर देख रहे हैं, जबकि चिकित्सा के नजरिए से इस घटना की वास्तविक वजह चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
सड़क के गड्ढे के झटके और सांस लौटने के बीच सीधे तौर पर चिकित्सकीय कारण-परिणाम स्थापित करना भी विशेषज्ञ जांच के बिना उचित नहीं होगा।
फिर भी यह घटना दो महत्वपूर्ण मुद्दों को एक साथ सामने लाती है—एक तरफ किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने की चिकित्सकीय प्रक्रिया और दूसरी तरफ मानसून में सड़कों की बदहाल स्थिति।
सड़क के गड्ढे ने लौटाई सांसें या खुला एक बड़ा सवाल?
ऋषिकेश में सामने आया यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक ओर अंतिम संस्कार की तैयारी पूरी हो रही थी और दूसरी ओर अचानक व्यक्ति के जीवित होने के संकेत मिले।
यदि सड़क के गड्ढे में एंबुलेंस को लगे झटके के बाद वास्तव में साईं राम की सांसें वापस चलने लगीं, तो यह घटना निश्चित रूप से बेहद असामान्य है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने से पहले चिकित्सकीय पुष्टि कितनी गंभीरता और सावधानी से की गई थी।
वहीं दूसरी ओर सड़क के गहरे गड्ढे भी प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल छोड़ते हैं। जिन सड़कों पर एंबुलेंस और आम लोग रोजाना सफर करते हैं, वहां बड़े गड्ढे केवल असुविधा नहीं बल्कि जानलेवा खतरा भी बन सकते हैं।
फिलहाल साईं राम एम्स ऋषिकेश में उपचाराधीन हैं। अब सबकी नजर उनके स्वास्थ्य और इस पूरे मामले की वास्तविक चिकित्सकीय वजह पर है।
एक ओर परिवार के लिए यह घटना अंतिम विदाई से नई उम्मीद तक पहुंचने की कहा