चारधाम यात्रा के चरम पर पहुंचते ही उत्तराखंड में ईंधन संकट ने यात्रियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बदरीनाथ और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर कई पेट्रोल पंपों में पेट्रोल और डीजल की भारी कमी देखने को मिल रही है। कई स्थानों पर पेट्रोल पंप पूरी तरह खाली हो चुके हैं, जबकि कुछ जगहों पर सीमित मात्रा में ही ईंधन दिया जा रहा है। इससे हजारों यात्रियों को लंबी कतारों और घंटों इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।
चमोली जिले में स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। बदरीनाथ धाम स्थित जीएमवीएन पेट्रोल पंप पर प्रशासन ने ईंधन वितरण की सीमा तय कर दी है। यहां एक वाहन को अधिकतम 800 रुपये का पेट्रोल और 1000 रुपये का डीजल ही दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को राहत मिल सके।
ज्योतिर्मठ में यात्रियों का फूटा गुस्सा
ज्योतिर्मठ के एकमात्र पेट्रोल पंप पर तेल समाप्त होने के बाद यात्रियों का धैर्य जवाब दे गया। बड़ी संख्या में यात्रियों ने पुलिस और प्रशासन के सामने नाराजगी जताते हुए नारेबाजी की। कई यात्री घंटों लाइन में लगे रहने के बाद भी बिना तेल भरवाए लौटने को मजबूर हुए।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से ईंधन का भंडारण न करें और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि आपूर्ति को सामान्य करने के प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं।
श्रीनगर, रुद्रप्रयाग और पीपलकोटी में भी असर
चारधाम यात्रा मार्ग के अन्य प्रमुख पड़ावों पर भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। श्रीनगर शहर के पांच में से चार पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल खत्म हो चुका है। वहीं Rudraprayag में कई पेट्रोल पंपों पर सीमित मात्रा में तेल दिया जा रहा है।
पीपलकोटी और ज्योतिर्मठ में वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। कई यात्री घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे, जिससे यात्रा व्यवस्था भी प्रभावित हुई। स्थानीय व्यापारियों और टैक्सी संचालकों ने भी ईंधन संकट को लेकर चिंता जताई है।
आपूर्ति बाधित होने से बढ़ी समस्या
पूर्ति विभाग के अनुसार रविवार को कई ईंधन टैंकर समय पर नहीं पहुंच सके, जिसके कारण संकट और गहरा गया। प्रशासन का कहना है कि भुगतान और आपूर्ति प्रणाली में बदलाव के चलते अस्थायी दिक्कत पैदा हुई है। हालांकि अधिकारियों ने दावा किया है कि अगले कुछ दिनों में आपूर्ति व्यवस्था सामान्य कर दी जाएगी।
इस बीच देशभर में बढ़ती तेल कीमतों का असर भी देखने को मिल रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, कीमतों में वृद्धि के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 600 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एलपीजी सिलेंडर पर भी कंपनियों को भारी घाटा झेलना पड़ रहा है।
चारधाम यात्रा के दौरान ईंधन संकट ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यात्रियों को सुरक्षित और सुगम यात्रा उपलब्ध कराने के लिए अब आपूर्ति व्यवस्था को जल्द सामान्य करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।