पूर्णागिरि मंदिर परिसर में चलाया स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण के लिए जनभागीदारी का किया आह्वान
खटीमा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर खटीमा स्थित पूर्णागिरि मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता अभियान चलाकर मंदिर परिसर में साफ-सफाई की तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से स्वच्छ और स्वस्थ उत्तराखंड के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपने घरों, मोहल्लों और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने का संकल्प लेने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है और इसके लिए अधिक से अधिक पौधरोपण करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान केवल वृक्षारोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रकृति और मातृत्व के प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक भावनात्मक अभियान है।
उन्होंने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण तभी सफल हो सकते हैं जब इन्हें जनभागीदारी का स्वरूप मिले और समाज का हर वर्ग इसमें योगदान दे।
खेत में उतरे मुख्यमंत्री, स्वयं चलाया टिलर
जैविक और पारंपरिक खेती को बढ़ावा देने का दिया संदेश
खटीमा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने निजी आवास नगला तराई स्थित खेत में पहुंचकर स्वयं टिलर चलाया और खेत की जुताई की। उन्होंने खेत में गोबर की प्राकृतिक खाद भी डाली और किसानों को जैविक एवं पारंपरिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर उनकी माता श्रीमती बिशना देवी भी मौजूद रहीं। खेत में श्रम करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों की मेहनत और कृषि परंपराओं के महत्व को रेखांकित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर की खाद जैसी प्राकृतिक पद्धतियां मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इससे न केवल कृषि उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और जैविक व प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और जैविक उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
युवाओं को खेती से जोड़ने की जरूरत
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी कृषि, ग्रामीण संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी हुई है। राज्य सरकार पारंपरिक खेती, बागवानी, प्राकृतिक कृषि और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देने के लिए युवाओं को खेती और ग्रामीण विकास से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यदि नई पीढ़ी कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचारों के साथ आगे बढ़ेगी तो उत्तराखंड कृषि और जैविक उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन सकता है।
मुख्यमंत्री के इन प्रयासों को स्थानीय लोगों और किसानों ने सराहा तथा पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में इसे प्रेरणादायक पहल बताया।